आयुर्वेदिक योनि धूपन थेरेपी: योनि संक्रमण (Vagina Infection), सफेद पानी (Vaginal Discharge) और महिलाओं की इंटिमेट हेल्थ की पूरी जानकारी | Ayur Air 

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आयुर्वेदिक योनि धूपन थेरेपी (Yoni Dhupan Therapy) क्या है?

योनि धूपन, जैसा कि योनि में धूप के माध्यम से आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों को पहुँचाना। हम माइक्रोवेव तरीके से, यानी धुएँ के माध्यम से, योनि में आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का असर पहुँचाते हैं। आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के जो औषधीय तत्त्व हैं, वे धुएँ के माध्यम से योनि तक पहुँचते हैं और अपना प्रभाव दिखाते हैं।

इस ब्लॉग पोस्ट में मैं चर्चा करूँगा उस थेरेपी के बारे में, जो आयुर्वेद में वर्णित सदियों से चली आ रही थेरेपी है।

इसको करने के लिए आपको किसी अस्पताल या आयुर्वेदिक सेंटर में जाने की ज़रूरत नहीं है। आप घर पर भी आयुर्वेदिक योनि धूपन कर सकते हैं।

आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार, खासकर वे महिलाएँ, जिन्हें बार-बार वेजाइनल इन्फेक्शन हो जाता है, इचिंग की प्रॉब्लम होती है, वेजाइना यानी योनि में खुजली, जलन होती है, उनके लिए यह बहुत ही इफेक्टिव मानी जाती है।

अगर डिलीवरी के कारण अक्सर महिलाओं में किसी भी कारण से वेजाइना लूज़ हो जाती है, तो उसके लिए भी आयुर्वेदिक योनि धूपन उपयोगी मानी जाती है। उसकी टाइटनिंग के लिए तथा सभी महिलाओं की वेजाइना में कसावट लाने के लिए सहायक मानी जाती है।

पुराने समय में आयुर्वेद में इसका उपयोग लगभग महीने में चार बार किया जाता था। वेजाइना में होने वाले इन्फेक्शन, संक्रमण, जलन, व्हाइट डिस्चार्ज जैसी समस्याओं के समाधान में यह सहायक सिद्ध हो सकती है।

योनि धूपन थेरेपी करने के लिए आवश्यक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ और सामग्री

योनि धूपन थेरेपी करने के लिए आपको निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होगी—

– बैठने के लिए वीणा (योनि धूपन सीट) या पूरी तरह जालीदार प्लास्टिक का स्टूल।

– गाय के गोबर के उपले।

– शुद्ध गुग्गुल धूप।

– वचा (Acorus calamus)

– अगरु।

– पिप्पली।

– नीम।

– हल्दी।

– खदिर।

– जटामांसी।

– शुद्ध गुग्गुल।

– ढीले और सूती कपड़े। इसके लिए सूती मैक्सी या सूती पेटीकोट पहन सकते हैं, ताकि धूप आसानी से योनि क्षेत्र तक पहुँच सके और शरीर आरामदायक रहे।

– मिट्टी की सरैया (अंगारे रखने के लिए)।

घर पर आयुर्वेदिक योनि धूपन थेरेपी कैसे करें? पूरी विधि

सबसे पहले आपको क्या करना है? आपको एक उपला यानी गाय के गोबर का कंडा चूल्हे में जला लेना है, यानी लकड़ियों की सहायता से उसे सुलगा लेना है। ध्यान रहे कि आप गाय के गोबर के कंडे को जलाने के लिए पेट्रोल, डीज़ल या किसी भी पॉलीथीन का उपयोग बिल्कुल न करें। केवल सूखी लकड़ियों की सहायता से ही कंडे को अच्छी तरह सुलगा लें।

कंडा सुलग जाने के बाद उसे आवश्यकता अनुसार थोड़ा-थोड़ा तोड़कर मिट्टी की सरैया में रख दें।

आपको शरीर पर ढीले कपड़े पहनने चाहिए। ऊपर टी-शर्ट या कोई ढीला कपड़ा पहन सकती हैं। कमर से नीचे सूती पेटीकोट पहनें। पेटीकोट के नीचे अपने गुप्तांग पर चड्डी, पैंटी या कोई तंग वस्त्र न पहनें, ताकि धूप का संपर्क बाहरी योनि क्षेत्र तक आसानी से हो सके।

अब आपको क्या करना है? मिट्टी की सरैया में रखे हुए जलते कंडे के ऊपर शुद्ध गुग्गुल धूप डालें। इसके बाद गाय के शुद्ध देसी घी की लगभग एक चम्मच डालें। ध्यान रहे कि घी इतना अधिक न डालें कि कंडा पूरी तरह भीग जाए।

शुद्ध गुग्गुल धूप डालने के बाद आप जालीदार स्टूल पर बैठ जाएँ। मेरे हिसाब से लकड़ी की बनी जालीदार वीणा (योनि धूपन सीट) अधिक अच्छी रहती है, इसलिए यदि उपलब्ध हो तो उसी का उपयोग करें। उसके नीचे जलते हुए कंडे वाली मिट्टी की सरैया रख दें और अपने पेटीकोट से चारों तरफ अच्छी तरह ढक लें, ताकि धुआँ बाहर कम निकले और उसका संपर्क बाहरी योनि क्षेत्र तक बना रहे।

आप इस जलते हुए गाय के गोबर के कंडे पर अपनी समस्या के अनुसार आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ डाल सकते हैं, जिनके बारे में हम आपको बता रहे हैं।

अगर आपको वेजाइना में इचिंग (खुजली) की समस्या है, तो आप पिप्पली, वचा और अगरु का पाउडर एक-एक चम्मच लेकर उस मिट्टी की सरैया में डालें, जिसमें जलता हुआ कंडा, शुद्ध गुग्गुल और देसी घी का धुआँ निकल रहा हो। इसके बाद उस सरैया को जालीदार वीणा के नीचे रख दें, ताकि धुएँ का संपर्क बाहरी योनि क्षेत्र तक बना रहे। आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार, यह थेरेपी इस प्रकार की समस्या में सहायक मानी जाती है।

अगर आपकी वेजाइना में संक्रमण (इन्फेक्शन) की समस्या है, तो आप नीम की पत्तियों का पाउडर बनाकर उसका उपयोग कर सकते हैं। इसमें थोड़ी मात्रा में शुद्ध हल्दी भी मिला सकते हैं। ध्यान रहे कि हल्दी शुद्ध होनी चाहिए।

अगर किसी महिला को वेजाइना में अधिक जलन (बर्निंग) होती है, तो वह खदिर का उपयोग कर सकती है। आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार खदिर शीतल गुणों वाला माना जाता है और इस प्रकार की समस्या में सहायक माना जाता है।

इस प्रयोग को सप्ताह में एक बार किया जा सकता है। इस दिन केवल खदिर का पाउडर ही उपयोग करें। जलते हुए कंडे पर गाय का देसी घी, शुद्ध गुग्गुल और ऊपर से खदिर का पाउडर डालकर, ऊपर बताई गई विधि के अनुसार योनि धूपन करें। इसके लिए अलग से एक दिन रखना उचित माना जाता है।

अगर किसी महिला की डिलीवरी के बाद योनि ढीली (Loose) हो जाती है, तो उसके लिए भी अलग से एक दिन निकालना होगा। इसके लिए मिट्टी की सरैया लें। उसमें गाय के गोबर का अच्छी तरह सुलगा हुआ कंडा रखें। उसके ऊपर एक चम्मच गाय का देसी घी और शुद्ध गुग्गुल डालें। इसके बाद जटामांसी और गुग्गुल का पाउडर डालें तथा ऊपर बताई गई विधि के अनुसार आयुर्वेदिक योनि धूपन करें। आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार, यह प्रक्रिया योनि में कसावट लाने में सहायक मानी जाती है।

चेतावनी

– जब आप गाय के गोबर के कंडे को सुलगाएँ, तब पेट्रोल, डीज़ल, किसी भी अन्य ज्वलनशील द्रव्य या पॉलीथीन के माध्यम से उसे न सुलगाएँ। केवल सूखी लकड़ियों के माध्यम से ही उपले को सुलगाएँ।

– मिट्टी की सरैया का ही उपयोग करें, किसी अन्य बर्तन का उपयोग न करें।

– केवल शुद्ध गुग्गुल और शुद्ध गुग्गुल धूप का ही उपयोग करें।

– केवल सूती कपड़े ही पहनें। सूती पेटीकोट पहनें। टेरीकॉट या किसी भी अन्य कपड़े का उपयोग न करें।

– योनि को अच्छी तरह साफ करके, उसके बाल (हेयर) हटा या ट्रिम करके ही इस आयुर्वेदिक योनि धूपन थेरेपी का उपयोग करें।

– अगर इस प्रक्रिया से पहले आपको टॉयलेट लगे, तो पहले टॉयलेट कर लें। टॉयलेट करने के बाद त्रिफला वॉटर से योनि को अच्छी तरह धो लें।

– योनि को अच्छी तरह सूती कपड़े से पोंछने के बाद ही आयुर्वेदिक योनि धूपन थेरेपी का उपयोग करें

आयुर्वेदिक योनि धूपन थेरेपी महीने में कितनी बार करनी चाहिए?

आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार, इस थेरेपी का उपयोग एक महीने में लगभग 3 से 4 बार किया जा सकता है।

आयुर्वेदिक योनि धूपन थेरेपी करने के बाद आवश्यक ध्यान देने योग्य बातें

– आयुर्वेदिक योनि धूपन थेरेपी करने के बाद लगभग आधा घंटे तक टॉयलेट करने न जाएँ।

– आयुर्वेदिक योनि धूपन थेरेपी करते समय क्या खाएँ और क्या न खाएँ, इसका भी ध्यान रखें।

– खट्टी चीज़ों का प्रयोग न करें। अधिक खट्टी चीज़ें खाने से बचें।

– कब्ज़ करने वाली चीज़ें, जैसे केला और उड़द की दाल, कम खाएँ या उनसे बचें।

– कोल्ड ड्रिंक और चाय के सेवन से बचें।

आयुर्वेदिक योनि धूपन थेरेपी करने के बाद आवश्यक ध्यान देने योग्य बातें

– आयुर्वेदिक योनि धूपन थेरेपी करने के बाद लगभग आधा घंटे तक टॉयलेट करने न जाएँ।

– आयुर्वेदिक योनि धूपन थेरेपी करते समय क्या खाएँ और क्या न खाएँ, इसका भी ध्यान रखें।

– खट्टी चीज़ों का प्रयोग न करें। अधिक खट्टी चीज़ें खाने से बचें।

– कब्ज़ करने वाली चीज़ें, जैसे केला और उड़द की दाल, कम खाएँ या उनसे बचें।

– कोल्ड ड्रिंक और चाय के सेवन से बचें।

– अगर आपको इस थेरेपी के बाद शरीर में गर्मी महसूस होती है, तो उसी दिन स्नान न करें। अगले दिन ही स्नान करें।

– अगर प्यास लगे, तो आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार लगभग 1 घंटे बाद ही पानी पिएँ।

– आयुर्वेदिक योनि धूपन थेरेपी करने के बाद शरीर को आराम दें।

महिलाओं के लिए आयुर्वेदिक योनि धूपन थेरेपी क्यों फायदेमंद है?

आयुर्वेदिक योनि धूपन थेरेपी के माध्यम से महिलाओं की योनि में हो रहे संक्रमण (इन्फेक्शन), संक्रामण तथा खुजली (Itching) जैसी समस्याओं को कम करने और उन्हें ठीक करने में यह सहायक सिद्ध हो सकती है।

महिलाओं की व्हाइट डिस्चार्ज (White Discharge) की समस्या तथा वैजाइना (Vagina) लूज़ होने की समस्या को सुधारने का यह प्रयास करती है और महिलाओं की योनि को टाइट बनाने में भी मददगार साबित हो सकती है। यदि आप हमारे द्वारा बताई गई विधि के अनुसार इसका उपयोग करते हैं, तो यह आपके लिए लाभकारी हो सकती है।

परंपरागत आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार, आयुर्वेदिक योनि धूपन थेरेपी महिलाओं के योनि संक्रमण (Vaginal Infection), इन्फेक्शन, वैजाइना लूज़ होने की समस्या तथा महिलाओं की योनि में होने वाली जलन की समस्या में सहायक मानी जाती है।

यह प्राचीन समय से उपयोग की जा रही एक आयुर्वेदिक विधि है

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