
परिचय
आयुर्वेद में अनेक प्राकृतिक पौधों का वर्णन मिलता है जिसमें एक सदाबहार है। एक प्राकृतिक पौधा जो हमेशा सदा हरा भरा रहता है उसे सदाबहार कहते हैं। इस पर सदा बहार आती रहती है इसलिए इसे सदाबहार कहते हैं। चाहे कोई भी मौसम हो सर्दी, बरसात, गर्मी हर मौसम में यह बहुत सदा हरा भरा रहता है इसलिए सदाबहार खिलाता है।
सदाबहार के पौधे के फूल, पत्तियां और तने का अलग-अलग बीमारियों के लिए उपयोग किया जाता है। आयुर्वेदिक में यह बहुत ही संजीवनी पौधा माना गया है।
इस पौधे का उपयोग फोड़े-फुंसी, रक्त विकार, डायबिटीज, कैंसर जैसी बीमारियों की समस्याओं के समाधान में यह उपयोगी बताया गया है।
हालांकि कैंसर जैसी बीमारियों के लिए कुछ और भी कारण हो सकते हैं लेकिन सदाबहार इसमें फायदेमंद हो सकता है अगर आप इसका सही तरीका से उपयोग करते हैं। आपकी स्टेज कौन सी चल रही हो कैंसर की, आपका इसको उपयोग करने में जाता क्या है, एक बार इसे उपयोग करके भी देख लें।
आयुर्वेदिक दवाई का भी नकारात्मक इफेक्ट नहीं डालती, वह कुछ न कुछ लाभ ही पहुंचाती है अगर आप सही तरीके से लेते हो।
सिद्धू पाजी की मां बीमार थीं, उन्होंने बोला इस अवस्था में थीं। लेकिन उन्होंने भी आयुर्वेदिक नुस्खे को बनाया और वह आज कैंसर से बच गए, तो क्या पता कौन सा आयुर्वेद नुस्खा आपकी जान बचाने के लिए भी सिद्धकारी लाभकारी हो सकता है। इसलिए आयुर्वेद का ट्रस्ट जरूरी है। आयुर्वेद जीवन दाता है, आयुर्वेदिक जीवन का विज्ञान है।
सिद्धू पाजी ने भी आयुर्वेदिक कोई अपनाया था, यह एक जागता उदाहरण है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में किसी भी आयुर्वेदिक नुस्खे को मुख्य उपचार का विकल्प मानने के बजाय योग्य चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है।
आयुर्वेद में समाधान की पारंपरिक पद्धतियां हैं। थोड़ा समय लग सकता है, लेकिन आयुर्वेदिक जीवन जरूर देता है। कैंसर जैसी बीमारी हो या अन्य गंभीर बीमारियां हों, उनसे लड़ने के लिए आयुर्वेद में पारंपरिक रूप से विभिन्न औषधीय उपायों का वर्णन मिलता है।
आप सदाबहार के फूल-पत्तियों का अर्क और हल्दी के कॉम्बिनेशन का उपयोग करने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह जरूर लें। अगर आप आयुर्वेद में विश्वास करते हैं तो उसके बारे में सही जानकारी प्राप्त करें। आयुर्वेद को समझें, आयुर्वेद को अपनाएं, तभी तो जानेंगे।
आपको या आपके किसी सहयोगी को कैंसर हो तो उसके इलाज के लिए डॉक्टर द्वारा बताए गए उपचार को छोड़कर केवल सदाबहार या किसी घरेलू नुस्खे पर निर्भर न रहें। कैंसर में जीवन की संभावना और उपचार व्यक्ति की बीमारी, प्रकार और अवस्था पर निर्भर करता है।
आयुर्वेद को सर्वप्रथम समझना जरूरी है। आयुर्वेद बहुत पुरानी चिकित्सा परंपरा है। आज के समय में अंग्रेजी दवाइयां भी आधुनिक चिकित्सा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनका उपयोग डॉक्टर की सलाह के अनुसार किया जाता है। आयुर्वेदिक औषधियों का उपयोग भी सही पहचान, सही मात्रा और योग्य चिकित्सक की देखरेख में होना चाहिए।
भारत जैसे देश में अनेक लोगों तक स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी पहुंचाना जरूरी है। हमारा उद्देश्य लोगों तक आयुर्वेदिक उपचार, आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों और आयुर्वेदिक ज्ञान को सही जानकारी के साथ पहुंचाना है। हमारा उद्देश्य केवल पैसा कमाना नहीं है, बल्कि लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और स्वस्थ जीवन के लिए सही जानकारी देना है। स्वास्थ्य और अच्छे वातावरण के साथ लोगों को बेहतर जीवन प्रदान करना हमारा उद्देश्य है।
सदाबहार पौधा क्या है
सदाबहार के पौधे की पहचान आप कैसे भी कर सकते हो, एक नॉर्मल वह हमेशा सदा हरा-भरा रहता है और चाहे मौसम कैसा भी हो और हमेशा सदाबहार रहता है। सदाबहार इसकी हो, इसके फूलों के रंग सफेद और गुलाबी से टाइप की ज्यादा होती हैं।
इसकी पत्तियां लगभग छोटी सी होती हैं और तना इसका स्ट्रेट सीधा सा होता है।
सदाबहार के अन्य नाम
सदाबहार पौधे को अलग-अलग क्षेत्रों और भाषाओं में कई नामों से जाना जाता है। यदि आपका पौधा सदाबहार (Catharanthus roseus) है, तो इसके प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:
हिंदी: सदाबहार, नयनतारा, बारहमासी
संस्कृत: नित्यकल्याणी
अंग्रेज़ी: Madagascar Periwinkle, Periwinkle
वनस्पति नाम: Catharanthus roseus
परिवार: Apocynaceae (कुटज कुल)
आयुर्वेद में सदाबहार पौधे का पारंपरिक महत्व
आयुर्वेद में सदाबहार को एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा माना गया है। यह मौसम भर हरा-भरा रहता है इसलिए सदाबहार कहा जाता है।
सदाबहार के विभिन्न भागों का त्वचा संबंधी समस्याओं, फोड़े-फुंसी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के पारंपरिक उपायों में बताया जाए।
और यह डायबिटीज, कैंसर, रक्त विकार संबंधी समस्याओं के लिए भी बहुत ही गुणकारी, लाभकारी बताया गया है। आयुर्वेद में इसकी चर्चा संजीवनी पौधे के रूप में की गई है।
सदाबहार में पाए जाने वाले प्रमुख तत्व और उनका महत्व – डायबिटीज, कैंसर, रक्त विकार, त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए उनका महत्व
विन्क्रिस्टीन
यह सदाबहार में सबसे महत्वपूर्ण एल्कलॉइड में से एक है। इससे बनी दवा आधुनिक कैंसर चिकित्सा में कुछ प्रकार के कैंसर, विशेषकर ल्यूकेमिया और लिम्फोमा आदि के उपचार में उपयोग की जाती हैं। यह कोशिका विभाजन के लिए आवश्यक माइक्रोट्यूब्यूल को प्रभावित करके कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि रोकने में मदद करती है।
विनब्लास्टीन
यह भी सदाबहार में महत्वपूर्ण विंका एल्कलॉइड है। इसका प्रयोग भी आधुनिक चिकित्सा में कुछ कैंसर के उपचारों में किया जाता है। यह ट्यूब्यूलिन से जुड़कर कैंसर विभाजन को रोकने में सहायक होता है।
विंडोलिन
यह सदाबहार की पत्तियों में पाया जाने वाला महत्वपूर्ण तत्व है। सदाबहार का उपयोग ग्लूकोज को नियंत्रित करने के संदर्भ में किया जाता है। अगर ग्लूकोज को नियंत्रित करेगा तो डायबिटीज जैसी बीमारियाँ कंट्रोल रहेंगी। यह डायबिटीज को सही करने में सहायक माना जाता है।
अगर आप सदाबहार की पत्तियाँ, फूलों फिर उसके अर्क का उपयोग करोगे तो आप पाएँगे कि आपकी डायबिटीज दिन-प्रतिदिन कंट्रोल होती जा रही है। आप सबसे पहले जब इसका उपयोग करें तो अपनी डायबिटीज को चेक करा लो, फिर इसके 6–7 दिन उपयोग करने के बाद पाएँगे कि आपकी डायबिटीज कंट्रोल होती जा रही है।
विंडोलिसिन
यह सदाबहार की पत्तियों में पाए जाने वाला महत्वपूर्ण तत्व है। यह ग्लूकोज को नियंत्रित करने में सहायक होता है। अगर ग्लूकोज कंट्रोल होगा तो डायबिटीज पर भी कंट्रोल हो सकता है। यह डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए महत्वपूर्ण तत्व साबित हो सकता है। यह फूल और पत्तियों में पाया जाता है।
सदाबहार का पौधा रक्त को शुद्ध करने का कार्य करता है। रक्त शोधन यानी ब्लड प्यूरीफिकेशन में जो भी रक्त में विकार हैं, उनमें जो दोष हैं, उनको सही करने में यह मदद करता है।
फोड़े-फुंसी और त्वचा संबंधी समस्याओं के विकारों में यह आपकी त्वचा पर होने वाले फोड़े-फुंसी को सही करने में सहायता प्रदान कर सकता है। पर आप इसका सही तरीके से उपयोग करते हो तो और इसके जो विकारों को बाहर निकालने का कार्य करते हैं, यानी यह जहर को खत्म करने का भी कार्य करता है।
हमने देखा कि ततैया खा जाए तो आप इसके रस को लगा देते हो, तो उससे सूजन कम हो जाती है। हमने यह प्रयोग कई लोगों पर किया है। यह जहर को कम करने का भी कार्य करता है, इस बात से यह प्रमाणित होता है।
और यह कैंसर जैसी समस्याओं के लिए तो लाभकारी है, तो यह रक्त शोधन के लिए भी बहुत ही महत्वपूर्ण है।
क्या सदाबहार डायबिटीज के लिए उपयोगी है?
हाँ, सदाबहार डायबिटीज के लिए उपयोगी हो सकता है। अगर आप नियमित इसका इस्तेमाल करते हैं, हमारे द्वारा बताई विधि से अगर आप इसे अपनाते हैं तो आप अपनी डायबिटीज पर कंट्रोल पा सकते हैं। आप पाएँगे कि आपकी डायबिटीज में दिन-प्रतिदिन सुधार होता जा रहा है।
दिन-प्रतिदिन यह आपकी डायबिटीज को कंट्रोल करने में मदद कर देगा और आप इसका सही विधि-विधान और खान-पान से संबंधित समस्याओं का ध्यान रखते हुए करोगे तो आप डायबिटीज से राहत पा सकते हो।
सदाबहार अर्क के उपयोग की विधि | मात्रा और जरूरी सावधानियां
सुबह-सुबह फ्रेश होकर सदाबहार के 10 से 15 फूल लें और 20 पत्तियाँ लें। इससे ज्यादा नहीं लें। इन्हें पीसकर सिलबट्टे पर पीसकर इसका अर्क छानकर निकाल लें। कपड़े से नहीं छानें।
और उस सदाबहार के फूल और पत्तियों के अर्क को आप पी लें। जब आप इसे सिलबट्टे पर पीसते हैं तो पानी का सहयोग कम लें। ज्यादातर पूरा अर्क निकालने यानी पूरा अर्क निकालने की कोशिश करें।
रोजाना कितनी मात्रा होनी चाहिए?
10 से 15 फूल और 20 पत्तियाँ।
सावधानियाँ
जब आप अर्क निकाल रहे हैं तब आप कम पानी का प्रयोग करें। पानी कम रखकर पूरा अर्क निकालने की कोशिश करें। सिलबट्टे पर पीसें। फूल और पत्तियों को मिक्सी में पीसने की कोशिश न करें और इसे सुबह फ्रेश होने के बाद ही उपयोग करें।
सदाबहार का उपयोग करते समय क्या खाएँ और क्या न खाएँ?
हरी-भरी सब्जियाँ खाएँ, दूध, दलिया खाएँ। खट्टी सब्जियों से दूर रहें, खट्टे पदार्थों का सेवन न करें।
अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं तो आप पके हुए फल न खाएँ। मेथी वगैरह, हरी सब्जियाँ, दूध, दलिया का उपयोग करें। दूध भी कम पिएँ और शुगर से दूर रहें। चीनी वगैरह न लें, मीठी वस्तुएँ न खाएँ। मैदा की चीजें न खाएँ। चाय वगैरह का उपयोग न करें। आलू का सेवन न करें। आलू की सब्जी के बजाय दालें ज्यादा खाएँ।
सभी के लिए जरूरी
चीनी एवं ठंडे पदार्थों का उपयोग न करें। ठंडी वस्तुएँ न खाएँ, जैसे कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम आदि।
चावल, केला और उड़द की दाल का उपयोग न करें। वासी वाली चीजें न खाएँ।
खट्टे पदार्थों का सेवन न करें। खट्टी चीजों को न खाएँ।
सदाबहार अर्क पीने के तुरंत बाद क्या करें?
अगर आप सदाबहार अर्क का उपयोग करते हो तो आपको क्या करना है? लगभग सदाबहार का उपयोग करने के 2 घंटे तक आपको कुछ खाना नहीं है। अगर पानी आप पीना चाहते हो तो पानी पी सकते हैं, लेकिन खाना नहीं है। 2 घंटे बाद ही खाना वगैरह कुछ खा सकते हो
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