
परिचय
आजकल लोग दैनिक जीवन में खान-पान में बदलाव के कारण अपनी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को लेकर जागरूक हो रहे हैं, वह जानना प्रतिदिन जागृत हो रहे हैं, वह आयुर्वेद के प्रति जुड़ रहे हैं। आयुर्वेद में शरीर को स्वस्थ रखने के लिए अनेक विधियाँ हैं, जो आपकी पावर को बढ़ाने में सहायक होने पर किसी लोग जीवन यापन जीने की चाह में आगे बढ़ रहे हैं। लोग जान गए हैं कि इंग्लिश दवाइयों में कुछ नहीं रखा, यह जीवन को धीरे-धीरे अंदर से खत्म कर रही हैं।
इंग्लिश दवाई, आयुर्वेद में हमने आपकी इम्युनिटी सिस्टम बढ़ाने के लिए जो आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों की चर्चा की है, उनमें हैं नीम, गिलोय, अदरक और हल्दी, कच्ची हल्दी। आप इनकी गाढ़ी का जब उपयोग करोगे, हमारे द्वारा बताई विधि के माध्यम से जब आप इसे उपयोग करोगे, तो आप अपनी इम्युनिटी पावर को स्ट्रॉन्ग कर पाओगे।
इसमें हमने यह बताया गया है इस आर्टिकल में नहीं बताया है कि आप अपनी इम्युनिटी को किस तरीके से एक नेचुरल तरीके से आप बूस्ट कर पाओगे।
आप दिन-प्रतिदिन बीमार होते जा रहे हो, बार-बार छींक आना, गले में खराश होना, बार-बार बुखार, जुकाम, बुखार होना, तो आप समझ लो कि आपकी इम्युनिटी पावर कम होती जा रही है। इसलिए आपको अपनी इम्युनिटी पावर को अगर मजबूत, अच्छा और फास्ट हेल्पफुल बनाना है, तो अब हमारे इस आर्टिकल को पढ़ सकते हो और आप हमारे द्वारा बताई विधि को अपना घर अपनी समस्या से समाधान कर सकते हो।
नीम, अदरक, गिलोय और हल्दी ऐसे द्रव्य हैं, जिनका परंपरा रूप से अलग-अलग प्रकार के उपयोग में उपयोग किया जाता है रोगों में, लेकिन यह इम्युनिटी के लिए वरदान साबित हैं। नीम, गिलोय तो इम्युनिटी के लिए वरदान ही है।
इसमें बताया गया आपको कौन-सी, किस प्रकार की गिलोय लेनी है, कौन-सी फॉर्म में लेनी है, आप ओरिजिनल फॉर्म आप कैसे प्राप्त करोगे, हमने इसमें बहुत सारा वर्णन किया है, सभी स्तर से। इसमें आपको किस तरीके से इस कार्य को उपयोग करना है, पीना है, क्या खाना, क्या नहीं खाना है, अब इसमें विस्तार से जानकारी पाओगे।
इम्युनिटी क्या है और यह हमारे शरीर के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
इम्युनिटी यानी रोग-प्रतिरोधक क्षमता हमारे शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा व्यवस्था है। हमारे शरीर को बाहर से आने वाले विभिन्न प्रकार के संक्रमण और संक्रमणों से बचाने में सहायक होती है। यह बचाती है हमारा प्रतिरक्षा तंत्र, हमारा तंत्र शरीर में प्रवेश करने वाले बैक्टीरिया, रोगजनक जीवाणुओं को पहचानने तथा उनसे मुकाबला करने और उनसे लड़ने का कार्य करती है। जब हमारा इम्युनिटी सिस्टम बढ़िया होता है, बढ़िया होता है, तो हमारा हमें कोई भी बीमारी छू नहीं सकती। अगर आपका इम्युनिटी सिस्टम ठीक है तो आप दिन भर स्फूर्ति-फुर्ती में रहेंगे और आप रोगों से बढ़िया तरीके से लड़ पाओगे, अच्छा स्वास्थ्य में जीवन जी पाओगे और आप रोगों से कम प्रभावित होंगे। यह इम्युनिटी सिस्टम पर ही डिपेंड करता है। जिस व्यक्ति का इम्युनिटी बेहतर होता है, उसका जीवन भी बेहतर ही रहता है।
अगर आपको इम्युनिटी सिस्टम अपना बढ़ोतरी करना है, बढ़ाना है, तो आपको खान-पान का भी ध्यान देना पड़ेगा। थोड़ा खान-पान में भी सुधार लाना पड़ेगा और नीम, गिलोय, अदरक, हल्दी का काढ़ा इन तीनों की कॉम्बिनेशन से बनाकर आप अगर पियोगे तो आपके इम्युनिटी सिस्टम में सुधार होगा और इम्युनिटी सिस्टम बूस्ट करेगा आपका।
इसके लिए और भी बातें हमें मिलती हैं, इम्युनिटी सिस्टम में सहयोग प्रदान करने के।
नीम, गिलोय, हल्दी और अदरक का आयुर्वेद में महत्व
आयुर्वेद में इनका विशेष रूप से प्रयोग किया जाता रहा है और किया जाता रहेगा। इन चारों द्रव्यों का अपना-अपना विशेष स्थान है। इन्हें आहार, पारंपरिक स्वास्थ्य देखभाल तथा विभिन्न प्रयोगों में उपयोग किया जाता है।
नीम, गिलोय
आयुर्वेद में बहुत ही महत्व है। यह इम्युनिटी बढ़ाने का इससे बेस्ट उपाय और कोई नहीं हो सकता है। इम्युनिटी बढ़ाने में तो यह सबसे बेस्ट आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है। नीम, गिलोय इम्युनिटी बूस्टर है। अगर आप इसे हम इस तरीके से बता रहे हैं, कॉम्बिनेशन में अगर इसका उपयोग करते हैं तो इसका इम्युनिटी में बहुत ही वरदान उपाय है।
इम्युनिटी ग्रो कराने के लिए बहुत ही वरदान साबित है। नीम के पेड़ पर लगती है, इसलिए नीम के पेड़ के लिए बनाई गई है। एक परजीवी तरीके से यह उस पर चढ़ जाती है।
इसे गुडूची भी कहा जाता है।
आयुर्वेद में इसके तने का उपयोग किया जाता है।
हल्दी
आयुर्वेद में कच्ची हल्दी एक वरदान मानी गई है। अगर कच्ची हल्दी का अगर आप उपयोग करती हो तो यह सर्दी-जुकाम से लड़ने में सहायक होती है। आपकी इम्युनिटी बूस्टर पावर को बढ़ाती है और जो इन्फेक्शन, बैक्टीरियल इन्फेक्शन होते हैं और अन्य जो मौसमी संबंधित बीमारियाँ होती हैं, उनसे लड़ने में सहायता प्रदान करती है। हल्दी अगर आप इसके काढ़े का उपयोग करोगे, इस कॉम्बिनेशन फॉर्म में तो…
आयुर्वेद में अदरक का महत्व
अगर इसे सुखा दिया जाए तो इसे सोंठ कहा जाता है। इस शॉर्ट फॉर्म में लिखना। कच्ची अदरक का उपयोग करती हो तो यह आपकी जो गले के इन्फेक्शन होते हैं, जो आप सर्दी से आपको मौसम संबंधी बीमारियाँ बनती हैं, तो उन्हें याद रखना, पोस्ट का कार्य करता है। यह आपकी प्रदान करता है और मौसम संबंधी बीमारियों से लड़ने में सहायता प्रदान करता है। याद रख, खाँसी-जुकाम जैसी समस्याओं से बचाने में सहायता प्रदान करता है।
नीम, गिलोय और हल्दी, अदरक जब तीनों का एक यूनिट का कॉम्बिनेशन हो जाता है, तो फिर यह एक इम्युनिटी बूस्टर की डोज बन जाता है और आप उसे उपयोग करते हो तो यह इम्युनिटी बढ़ाने में बहुत ज्यादा सहायता प्रदान करता है। इसका काढ़ा अगर आप इसका काढ़ा प्रतिदिन उपयोग करती हो, इस कॉम्बिनेशन में, तो आप आने की बीमारियों से राहत पा सकते हो। यह इम्युनिटी बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक तत्व है। यह इनको इतनी सब कुछ मात्रा में हमारे द्वारा दिए निर्देश के अनुसार लिया जाए तो आप अपनी इम्युनिटी को बूस्ट करवाओगे।
क्या यह उपाय हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित है?
हाँ, यह उपाय हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित है। हर व्यक्ति अपनी इम्युनिटी सिस्टम को बूस्ट कर सकता है। इसे हमारे द्वारा बताई गई विधि के माध्यम से इस घरेलू नुस्खे को अपनाकर आप अपनी इम्युनिटी सिस्टम को मजबूत कर सकते हैं।
इम्युनिटी मजबूत करने के लिए नीम, गिलोय, हल्दी और अदरक का काढ़ा कैसे बनाएं?
सबसे पहले आपको क्या करना है, नीम गिलोय लानी है। नीम के पेड़ से जो नीम की लकड़ी होती है, बेल उसे बेल फॉर्म को तने को लेना है, लकड़ी को लेना है। आपको 30 ग्राम नीम गिलोय और 10 ग्राम हल्दी और 10 ग्राम अदरक लेना है। यह तीनों कच्ची फॉर्म में लेनी है, यानी अदरक भी कच्चा लेना है, हल्दी भी कच्ची लेनी है। इन तीनों को ढंग से किसी पात्र में कूट रहा है, कूटकर आपको 500 ग्राम पानी में डाल लेना है और इन्हें धीमी-धीमी आग पर पकाना, धीमी-धीमी आग पर फिर मध्यम आंच पर इन्हें उबालना, अच्छी तरीके से यानी काढ़ा बनाना है। जब आधा किलो पानी में से 100 ग्राम पानी रह जाए, तब आपको छानकर इस कॉम्बिनेशन काढ़े को एक स्टील के बर्तन में रख लेना है और ठंडा होने देना है।
इम्युनिटी काढ़ा का उपयोग कैसे करें?
जब आप सुबह फ्रेश होकर इस काढ़े को बना लेते हैं, तो आपको इसको ठंडा कर लेना है। ठंडा करके इस काढ़े को पी लेना है। पी लेने में आपको फ्रेश होकर पी लेना है।
काढ़ा पीने के बाद सावधानियाँ
जब आप काढ़ा पी लें तो उसके तुरंत बाद पानी न पिएँ, लगभग एक घंटा तक और न ही कुछ खाएँ। इस बात का विशेष ध्यान रखना है।
जब आप इस इम्युनिटी काढ़े का उपयोग कर रहे हैं
जब इसको उपयोग में ले रहे हैं तब आपको अपने खान-पान का भी विशेष ध्यान रखना है।
क्या खाएँ
बढ़िया साग-सब्जी, हरी सब्जी खाएँ और दूध-दलिया खाएँ। प्रोटीन युक्त पदार्थ खाएँ।
क्या न खाएँ और क्या न पिएँ
कोल्ड ड्रिंक न पिएँ। शराब, सिगरेट, गुटखा, बीड़ी, तंबाकू इनसे दूर रहें, जब तक आप इसका उपयोग कर रहे हैं, जब तक।
धूम्रपान से बचें।
और आप वादी की चीजें न खाएँ, जो आपको भारी करें, यानी केला, चावल, खीर, उड़द की दाल, इन चीजों से बचें।
चेतावनी
और आप नीम गिलोय उपयोग कर रहे हैं, तो ओरिजिनल नहीं मिल रही, उपयोग करें जो नीम के पेड़ पर चढ़ी हो। कुछ नहीं बोलो, ऐसी होती है। लोग नाम मात्र की नीम गिलोय ले लेते हैं, जो किसी भी पेड़ पर चढ़ जाती है, उसे उपयोग नीम ले कोई उपयोग कर लेते हैं। उसमें वह तत्व नहीं मिलते जो नीम के पेड़ से मिलते हैं। उसमें जो नीम के एंटीबैक्टीरियल गुण, नीम गिलोय में नीम के गुण नहीं आते हैं। जो लोग किसी भी पेड़ से नीम गिलोय उठा लेते हैं और उसे उपयोग कर लेते हैं, बोलते हैं कि यह नीम गिलोय नहीं, बोलो नीम गिलोय नहीं कहलाती है। वह तो किसी भी पेड़ से आपने उठा ली। हमेशा उसी को उपयोग करें जो नीम के पेड़ पर चढ़ी हो। वही ओरिजिनल नीम गिलोय कहलाती है। अगर किसी और पेड़ पर नीम गिलोय चढ़ी है, तो आप उसे उठाकर नीम के पेड़ पर लगा दें और लगभग 6 महीना तक जब उसके पेड़ पर लगी रहे, उसमें नीम का गुण पहुँच जाए, जब उसी नीम में मान सकते हो। आप किसी भी पेड़ पर नीम गिलोय चढ़ जाए, आप उसे नीम में नहीं मान सकते।
असली नीम गिलोय की पहचान कैसे करें?
जो नीम गिलोय नीम के पेड़ पर चढ़ी हुई है, वही ओरिजिनल है, उसे उपयोग करें। अंततः किसी और नीम गिलोय का उपयोग न करें।
अगर किसी और पेड़ पर नीम गिलोय चढ़ी हुई है, तो उसे उतार लें और नीम के पेड़ पर चढ़ा दें और उसे 6 महीना तक चढ़े रहने दें। तब उसमें नीम का गुण आ सकता है, अन्यथा नीम गिलोय नहीं कहलाएगी। नीम के पेड़ पर चढ़ गई, ओरिजिनल कहलाती है।
इस इम्युनिटी पावर काढ़े का उपयोग कितने समय तक करें?
इस काढ़े का उपयोग कितने समय तक करना है, यह व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, खान-पान और शरीर की क्षमता पर निर्भर करता है। केवल इम्युनिटी बढ़ाने के उद्देश्य से इसे लंबे समय तक लगातार लेने के बजाय सीमित अवधि में उपयोग करना और बीच-बीच में शरीर की प्रतिक्रिया पर ध्यान देना बेहतर है।
फिर भी सामान्य रूप से लगभग दो माह तक तो लेना ही चाहिए।
नोट
अगर आप किसी बात को जानने में असमर्थ हो या किसी बात को जानने की जरूरत है, तो आप हमसे संपर्क कर सकते हो। हमारी साइट Ayur Air पर जो WhatsApp नंबर दिया गया है, उस पर WhatsApp करके।
और अगर आप इम्युनिटी पावर काढ़ा आयुर्वेदिक प्राप्त करना चाहते हो, आयुर्वेदिक तरीके से हमने बनाया है, तो आपको हम ऑनलाइन प्रदान करा सकते हैं, घर बैठे।
अगर आप ओरिजिनल नीम गिलोय का रस लेना चाहते हो, जो आपके काढ़े में डालकर आपको काढ़ा बनाने में सहयोग प्रदान करेगा, तो आप यह नीम गिलोय रस से ले सकते हो, जिसको अब इस विधि में ऐड करके काढ़ा बना सकते हो।