हाथ-पैरों में कंपन, गर्दन का हिलना और आवाज़ का कांपना – कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक देखभाल | अरंडी की खीर का पारंपरिक उपयोग | Ayur Air

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परिचय

हाथ-पैरों में कंपन, गर्दन का हिलना और आवाज़ का कांपना ऐसी समस्याएँ हैं जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती हैं। इन समस्याओं को सामान्य कमजोरी समझकर नज़रअंदाज़ न करें। कुछ मामलों में यह तंत्रिका तंत्र (Nervous System) से जुड़ी समस्याओं का संकेत भी हो सकता है। इसलिए यह जानना बहुत ज़रूरी है कि हाथ-पैरों का कंपन, आवाज़ का कांपना और गर्दन का हिलना किन बीमारियों के लक्षण हो सकते हैं तथा कब आपको आयुर्वेदिक डॉक्टर से मिलना चाहिए। आयुर्वेदिक डॉक्टर ही आपकी समस्या का आकलन करके उचित मार्गदर्शन और उपचार बता सकते हैं।

अगर अरंडी की खीर का उचित तरीके से उपयोग किया जाए, तो आयुर्वेदिक परंपरा के अनुसार यह कुछ लोगों में लाभ पहुँचाने में सहायक मानी जाती है। इस लेख में हम अरंडी की खीर बनाने की विधि, सेवन करने का सही तरीका, आवश्यक सावधानियाँ और इससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी भी विस्तार से बताएँगे।

साथ ही, इस समस्या में खान-पान का भी महत्वपूर्ण संबंध माना जाता है। यदि आप इस समस्या से राहत पाना चाहते हैं, तो आयुर्वेदिक उपचार के साथ-साथ अपने खान-पान और दैनिक जीवनशैली पर भी विशेष ध्यान देना आवश्यक है।

इस लेख में यह भी बताया गया है कि आपको किन-किन चीज़ों का परहेज़ करना है, कौन-सी चीज़ें नहीं खानी हैं, कौन-कौन सी वस्तुएँ आपके लिए हानिकारक हो सकती हैं तथा आयुर्वेदिक दवा का प्रयोग करते समय किन खाद्य पदार्थों और आदतों से बचना चाहिए, ताकि दवा का पूरा लाभ मिल सके और उपचार में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

यदि किसी व्यक्ति की गर्दन अपने आप हिलती हो, हाथ-पैरों में कंपन रहता हो, बोलते समय आवाज़ या गर्दन में कंपन महसूस होता हो, या चलने में जकड़न जैसी समस्याएँ दिखाई दें, तो इन्हें बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

आयुर्वेद में स्वस्थ जीवन जीने के लिए संतुलित दिनचर्या और आयुर्वेदिक जीवनशैली का विशेष महत्व बताया गया है। इस लेख के माध्यम से हम आपको आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाने के बारे में सरल और उपयोगी जानकारी देंगे। यदि आपको किसी प्रकार की समस्या आती है, तो आप हमसे अपना सुझाव या प्रश्न भी साझा कर सकते हैं।

हाथ-पैरों में कंपन, गर्दन का हिलना और आवाज़ का कांपना क्या है?

हाथ-पैरों में कंपन, गर्दन का हिलना और आवाज़ का कांपना कई प्रकार की बीमारियों के लक्षण हो सकते हैं। इन समस्याओं को सामान्य समझकर या कमजोरी मानकर बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह तंत्रिका तंत्र (Nervous System) से जुड़ी विभिन्न समस्याओं का संकेत भी हो सकती हैं। आज के समय में ऐसी अनेक बीमारियाँ देखने को मिल रही हैं जो नर्वस सिस्टम को प्रभावित करती हैं और समय पर ध्यान न देने पर समस्या बढ़ सकती है।

आयुर्वेद के अनुसार यदि सही कारण की पहचान करके उचित तरीके से उपचार किया जाए, उचित खान-पान रखा जाए और सही जीवनशैली अपनाई जाए, तो ऐसी समस्याओं में लाभ प्राप्त करने का प्रयास किया जा सकता है। आयुर्वेद शरीर को संतुलित रखने और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान देता है।

यह समस्या मांसपेशियों, जोड़ों, नसों (नाड़ी तंत्र) तथा तंत्रिका तंत्र से संबंधित कारणों से भी जुड़ी हो सकती है। कुछ स्थितियों में नसों तक रक्त संचार (Blood Circulation) ठीक से न पहुँचने या शरीर के किसी भाग तक पर्याप्त रक्त प्रवाह में कमी होने के कारण भी संबंधित अंग प्रभावित हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में हाथ-पैरों में कंपन, गर्दन का हिलना या अन्य प्रकार की परेशानियाँ महसूस हो सकती हैं। इसलिए इन लक्षणों को हल्के में लेने के बजाय समय पर उचित जांच और आवश्यक उपचार कराना महत्वपूर्ण है। इस लेख में हमने बताया है कि आयुर्वेद में अरंडी की खीर का क्या उपयोग है। आपको किन-किन चीज़ों का सेवन करना चाहिए, किन-किन चीज़ों का परहेज़ करना चाहिए, किन वस्तुओं का सेवन आपके लिए लाभकारी हो सकता है और किन वस्तुओं से बचना चाहिए, ताकि आपको उचित लाभ प्राप्त हो सके। साथ ही अरंडी की खीर बनाने की विधि, सेवन करने का सही तरीका, आवश्यक सावधानियाँ तथा आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बातों को भी विस्तार से बताया गया है, जिससे आप इस विषय को अच्छी तरह समझ सकें।

यह समस्या क्यों होती है?

इस समस्या के होने के कई कारण हो सकते हैं, केवल एक कारण नहीं है। हाथ-पैरों में कंपन, गर्दन का हिलना और आवाज़ का कांपना कई अलग-अलग कारणों से हो सकता है। कुछ लोगों में यह समस्या बढ़ती उम्र, अत्यधिक तनाव, चिंता, नींद की कमी, शरीर की कमजोरी, कुछ रासायनिक प्रभावों तथा अंग्रेज़ी दवाइयों के प्रभाव के कारण भी हो सकती है। वहीं कुछ मामलों में यह तंत्रिका तंत्र (Nervous System), मांसपेशियों, नसों (नाड़ी तंत्र) या अन्य नसों से संबंधित समस्याओं तथा मांसपेशियों से जुड़ी समस्याओं के कारण भी हो सकती है।

आयुर्वेद के अनुसार वात, पित्त और कफ का असंतुलन होना भी इसका एक कारण माना जाता है। मुख्य रूप से वात दोष का बढ़ना इस समस्या का एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है।

इसके अलावा खान-पान संबंधी कई समस्याएँ भी इसका कारण बन सकती हैं, जैसे समय पर भोजन न करना, देर से भोजन करना, कभी भोजन करना और कभी भोजन न करना, पौष्टिक भोजन की कमी, संतुलित आहार का सेवन न करना, प्रोटीन युक्त भोजन का पर्याप्त सेवन न करना आदि। ये सभी कारण शरीर के संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं।

इसलिए सबसे पहले यह जानना आवश्यक है कि यह समस्या किस कारण से हो रही है। कारण की उचित पहचान करके, उचित परहेज़ अपनाकर तथा आयुर्वेदिक खीर का सही तरीके से सेवन करके लाभ प्राप्त करने का प्रयास किया जा सकता है।

भोजन करने के बाद भी कुछ ऐसे नियम होते हैं, जिनका पालन करना आवश्यक होता है। यदि आप उन नियमों का पालन नहीं करेंगे, तो उनके कारण भी इस प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए इस लेख में हम उन सभी नियमों, उचित खान-पान, आवश्यक परहेज़ तथा आयुर्वेदिक जीवनशैली के बारे में भी विस्तार से बताएँगे।

इसके लक्षण क्या हैं?

हाथ-पैरों में कंपन, गर्दन का हिलना और आवाज़ का कांपना इस समस्या के मुख्य लक्षण हो सकते हैं। शुरुआत में यदि आप इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ करेंगे और इन पर ध्यान नहीं देंगे, तो यह समस्या आगे चलकर बढ़ सकती है। इसलिए इस समस्या पर समय रहते ध्यान दें और समय के साथ इसका उचित उपचार कराएँ। हर व्यक्ति में इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं।

इस समस्या में हाथ-पैरों में कंपन होना, गर्दन का हिलना, आवाज़ का कांपना, किसी वस्तु को पकड़ने में कठिनाई होना, लिखते समय हाथों का कांपना, खाना खाते समय हाथों या गर्दन का कंपन होना, शरीर में कमजोरी महसूस होना तथा दैनिक कार्य करने में कठिनाई जैसी समस्याएँ भी दिखाई दे सकती हैं।

कुछ लोगों में तनाव, चिंता, घबराहट, अधिक थकान या नींद की कमी होने पर यह लक्षण और अधिक बढ़ सकते हैं। इसलिए इन लक्षणों को बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

यदि आपको ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो आप अपनी आवश्यक जांच करा सकते हैं। साथ ही उचित सलाह के लिए योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं। यदि आप हमसे संपर्क करना चाहते हैं, तो हम आपको उचित मार्गदर्शन देने का प्रयास करेंगे।

किन बीमारियों का संकेत हो सकता है?

हाथ-पैरों में कंपन, गर्दन का हिलना और आवाज़ का कांपना अनेक बीमारियों के लक्षण हो सकते हैं। लेकिन इनमें जो मुख्य बीमारियाँ हैं, उनका विस्तृत अध्ययन करके हम आपको बता रहे हैं। इस लेख में उन प्रमुख बीमारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है, ताकि आप इन लक्षणों को बेहतर तरीके से समझ सकें और समय रहते उचित कदम उठा सकें।

1.एसेंशियल ट्रेमर (Essential Tremor) –

यह सबसे आम कारण है। इसमें हाथ, गर्दन और आवाज़ में कंपन होता है। इस बीमारी में अक्सर यह समस्या देखने को मिलती है। जिस व्यक्ति को यह बीमारी होती है, वह जब बात करता है तब उसकी गर्दन स्प्रिंग की तरह वाइब्रेट करती है और उसकी आवाज़ रुक-रुककर निकलती है। उसके हाथ भी कांपते हैं। यह इस बीमारी के लक्षण हो सकते हैं।

2.पार्किंसन रोग (Parkinson’s Disease)

इस बीमारी के लक्षण हैं: आराम की स्थिति में हाथ कांपना, चलने में कठिनाई होना, तथा शरीर में जकड़न होना।

3.सर्वाइकल डिस्टोनिया (Cervical Dystonia) –

गर्दन की मांसपेशियों में असामान्य संकुचन के कारण गर्दन बार-बार हिलने लगती है।

किन लोगों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है?

जो लोग संतुलित आहार का सेवन नहीं करते, पर्याप्त नींद नहीं लेते, अधिक तनाव और टेंशन में रहते हैं, अधिक सोचते रहते हैं तथा हमेशा चिंता और मानसिक दबाव वाला जीवन जीते हैं, उनमें यह समस्या अधिक देखने को मिल सकती है। इसके अलावा जो लोग अपने स्वास्थ्य और दैनिक जीवनशैली पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते, उनमें भी इस प्रकार की समस्या होने की संभावना बढ़ सकती है।

जो लोग मधुमेह (डायबिटीज़) से अधिक प्रभावित हैं, उनमें भी यह समस्या अधिक देखने को मिल सकती है। साथ ही जो लोग लंबे समय तक अधिक मात्रा में अंग्रेज़ी दवाइयों का प्रयोग करते हैं, उन्हें भी अपने स्वास्थ्य के प्रति विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

इसलिए आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाने का प्रयास करें, संतुलित खान-पान रखें, पर्याप्त नींद लें, मानसिक तनाव को कम करने का प्रयास करें तथा नियमित दिनचर्या का पालन करें। आयुर्वेद के अनुसार स्वस्थ जीवनशैली अपनाना शरीर के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण माना गया है।

आयुर्वेद में इसका उपचार कैसे बताया गया है?

आयुर्वेद के अनुसार हाथ-पैरों में कंपन, गर्दन का हिलना और आवाज़ का कांपना जैसी समस्याओं के उपचार के लिए सबसे पहले इनके कारणों को समझना आवश्यक है। आयुर्वेद में प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति, वात, पित्त और कफ की स्थिति, खान-पान तथा जीवनशैली को ध्यान में रखकर उपचार किया जाता है। आयुर्वेद में वात, पित्त और कफ को संतुलित रखने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। मुख्य रूप से वात दोष का असंतुलन इस प्रकार की समस्याओं का एक प्रमुख कारण माना जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार वात का असंतुलन ही ऐसी समस्याएँ उत्पन्न कर सकता है। यदि आप आयुर्वेदिक अरंडी की खीर का उचित तरीके से प्रयोग करेंगे, तो लाभ प्राप्त करने का प्रयास किया जा सकता है। इस लेख में हमने बताया है कि इसका उपयोग किस प्रकार करना है, किस प्रकार का परहेज़ करना है तथा इसका उपयोग करते समय किन-किन सावधानियों का ध्यान रखना आवश्यक है।

यदि आयुर्वेद में बताए गए सही तरीके, उचित परहेज़ तथा हमारे द्वारा बताई गई विधि के अनुसार आयुर्वेदिक अरंडी की खीर का उपयोग किया जाए, तो इन समस्याओं में लाभ प्राप्त करने का प्रयास किया जा सकता है। साथ ही संतुलित खान-पान, उचित दिनचर्या और आवश्यक सावधानियों का पालन करना भी उतना ही महत्वपूर्ण माना गया है।

क्या अरंडी की खीर लाभकारी हो सकती है?

यदि आप अरंडी की खीर का उपयोग हमारे द्वारा बताई गई विधि और सही तरीके से करेंगे तथा आवश्यक परहेज़ का पालन करेंगे, क्या खाना है और क्या नहीं खाना है जैसी बातों पर विशेष ध्यान देंगे, तो आपको लाभ प्राप्त हो सकता है। इस लेख में हमने अरंडी की खीर बनाने की सही विधि, सेवन करने का तरीका, आवश्यक परहेज़, सावधानियाँ तथा किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, इसके बारे में विस्तार से बताया है, ताकि आप इसका उचित तरीके से उपयोग कर सकें।

अरंडी की खीर कैसे लाभकारी हो सकती है?

हाथ-पैरों में कंपन, गर्दन में कंपन (Vibration) और आवाज़ में कंपन जैसी समस्याओं में अरंडी की खीर का उपयोग आयुर्वेदिक परंपरा के अनुसार किया जाता है। यदि इसका प्रयोग हमारे द्वारा बताई गई विधि, उचित नियमों और परहेज़ के अनुसार किया जाए, तो यह स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकती है।

हमने इस लेख में अरंडी की खीर बनाने की विधि, सेवन करने का तरीका और आवश्यक सावधानियों के बारे में विस्तार से बताया है। यदि आप इसका उपयोग सही तरीके से करते हैं और हमारे द्वारा बताए गए नियमों का पालन करते हैं, तो आपको इसके पोषण संबंधी लाभ प्राप्त हो सकते हैं।

इस खीर में प्रयोग की जाने वाली सामग्री जैसे अरंडी की गिरी (शोधित), नारियल की गिरी, बादाम की गिरी, बबैया के बीज और बकरी का दूध पारंपरिक रूप से पोषक तत्वों से भरपूर माने जाते हैं।

अरंडी की गिरी (शोधित) और नारियल की गिरी में पाए जाने वाले पोषक तत्व शरीर को ऊर्जा और पोषण देने में सहायक हो सकते हैं। बबैया के बीज और बादाम की गिरी भी अपने पोषक गुणों के लिए जाने जाते हैं।

बादाम की गिरी को मस्तिष्क के लिए पौष्टिक आहार माना जाता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायता कर सकते हैं।

बकरी के दूध का महत्व

बकरी का दूध भी इस खीर में एक महत्वपूर्ण सामग्री है। बकरी का दूध पारंपरिक रूप से पौष्टिक और आसानी से पचने वाला माना जाता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर को ऊर्जा और आवश्यक पोषण प्रदान करने में सहायता कर सकते हैं।

हाथ-पैरों का कंपन, गर्दन में कंपन (Vibration) होना और बोलते समय आवाज़ का कांपना जैसी समस्याओं में बकरी के दूध का उपयोग पारंपरिक रूप से किया जाता है। इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं।

बकरी के दूध में पाए जाने वाले पोषक तत्व शरीर की नसों और सामान्य रक्त संचार (Blood Circulation) को बनाए रखने में सहायता कर सकते हैं।

अरंडी की खीर बनाने के लिए आवश्यक सामग्री

यदि आप पारंपरिक विधि से अरंडी की खीर बनाना चाहते हैं, तो आपको निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होगी:अरंडी की शोधित गिरी – 50 ग्रामबादाम की गिरी – 10 ग्रामबबैया के बीज – 10 ग्रामबकरी का दूध – 800 ग्राम«महत्वपूर्ण: अरंडी की गिरी का उपयोग केवल शोधित (शुद्ध की हुई) अवस्था में ही करें।

अरंडी की खीर बनाने की विधि

सबसे पहले आप नारियल की गिरी को कद्दूकस कर लें।

फिर उसके बाद आप अरंडी में से गिरी निकालें और गिरी निकालकर उन्हें सिलबट्टे पर पीस लें। उनका एक पेस्ट बनाकर अलग बर्तन में रख लें।

और फिर उसके बाद बबैया के बीज बबैया से निकालकर साफ करके अलग किसी बर्तन में रख लें। यह तुलसी के पेड़ की तरह होता है। बबैया का पेड़ भी तुलसी की तरह होता है, जिस पर बालियां लगती हैं। उन बालियों को हाथ में लेकर मिलाकर साफ करें और उनसे बीज निकालकर एक बर्तन में रख लें।

फिर उसके बाद बादाम की गिरी को सिलबट्टे पर पीसकर किसी बर्तन में रख लें। बादाम की गिरी को बिना पानी डाले सूखा पीसना है और उसे बर्तन में रख लें।

फिर आपको क्या करना है कि बकरी का दूध लेना है, लगभग 800 ग्राम, और उसको धीमी आंच पर गर्म होने दें।

फिर उसमें सबसे पहले आपको पिसी हुई अरंडी की गिरी डालनी है। इसके बाद 5 मिनट के बाद उसमें नारियल की गिरी डालनी है और साथ ही बादाम की गिरी डालनी है।

अब इन गिरीयों को दूध में अच्छी तरह पकने दें। जब अच्छा उबाल आ जाए और कच्चापन पूरी तरह खत्म हो जाए, तब इसे धीमी आंच पर पकाते रहें।

जब आप इस दूध को उतारने वाले हों, तो उससे लगभग 5 मिनट पहले आपको बबैया के बीज डालने हैं। जब बबैया के बीज डालने के बाद इसमें अच्छी तरह उबाल आ जाए, तो इसे लगभग 5 मिनट तक पकने दें। इसके बाद इसे उतार लें।

अंत में दूध उतारते समय तक इसे गर्म करते रहें। जब तक दूध लगभग 400 ग्राम रह जाए, तब इसे उतार लें।

इसके बाद इसे ठंडा होने दें और गुनगुनी अवस्था में रहने दें। इसे पूरी तरह ठंडा नहीं होने देना है। फिर इसका सेवन कर लें।

सेवन करने की विधि हम आपको बताएंगे कि इसे कैसे और कब करना है।

अरंडी की खीर सेवन करने का तरीका

अरंडी की खीर का सेवन पारंपरिक रूप से उचित विधि और मात्रा का ध्यान रखते हुए किया जाता है। इसे हमेशा गुनगुनी अवस्था में ही सेवन करने की सलाह दी जाती है।

सुबह जब आप फ्रेश होकर आते हैं और आपका पेट खाली हो, तब इसे गुनगुनी अवस्था में सेवन करें। इसे खाने के बाद लगभग 2 घंटे तक पानी न पिएं। इसके बाद ही कुछ खाकर पानी का सेवन करें।

क्या खाएं और क्या न खाएं?

जब आप इसका सेवन करते हैं तो आपको खट्टे पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। खट्टी चीजों से परहेज करें। आपको चटपटी और खट्टी वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए।

आप चावल, खटाई वाले पदार्थ और बासी चीजों का सेवन न करें। ठंडी चीजों से भी बचना चाहिए।

साथ ही आपको चीन (तंबाकू), गुटखा, बीड़ी, सिगरेट आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। यदि आप किसी भी प्रकार के नशे के आदी हैं तो उसका उपयोग न करें।

Cold Drink और ठंडी चीजों से बचें

कोल्ड ड्रिंक न पिएं। किसी भी प्रकार के ठंडे पेय पदार्थों का प्रयोग न करें। एनर्जी ड्रिंक का सेवन भी न करें।

खट्टे पदार्थों का प्रयोग न करें

जब आप इसका सेवन करते हैं तो खट्टी वस्तुओं से बचना चाहिए। इमली, खटाई, पानी की टिक्की और ऐसी अन्य खट्टी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

Cold Water का प्रयोग न करें

आप ठंडा पानी न पिएं। फ्रिज का पानी न पिएं। ठंडे पानी की जगह प्राकृतिक और शुद्ध जल का सेवन करें।

कब तक सेवन करें?

यदि आप इसका नियमित रूप से सेवन करते हैं तो लगभग 6 माह तक सेवन करने से हाथ-पैरों का हिलना, गर्दन का हिलना, आवाज कांपना, हाथ-पैर और गर्दन में कंपन जैसी समस्याओं में आयुर्वेदिक नुस्खे के रूप में सहायता मिल सकती है।

नोट
यदि आप इसमें मिठास के रूप में गुड़ जोड़ना चाहते हैं तो गुड़ का प्रयोग कर सकते हैं। थोड़ा सा गुड़ हाथ में लेकर इसे खा सकते हैं, लेकिन इसमें चीनी का प्रयोग नहीं करना है।

चेतावनी

गर्भवती महिलाएँ अरंडी की खीर का उपयोग बिल्कुल न करें। यदि कोई महिला गर्भधारण की योजना बना रही है या गर्भावस्था में है, तो उसे इसका सेवन नहीं करना चाहिए।जिन महिलाओं या पुरुषों के शरीर में अत्यधिक गर्मी (पित्त) रहती है या जो गर्म तासीर से अधिक प्रभावित होते हैं, वे भी अरंडी की खीर का उपयोग बिना आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह और देखरेख के न करें।गर्भवती महिलाओं के लिए यह उपयुक्त नहीं है। बच्चे के जन्म के बाद, यदि आवश्यकता हो, तो आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह के अनुसार अरंडी की खीर का उपयोग किया जा सकता है।

नोट

यदि आप इसे बनाने में असमर्थ हैं तो आप हमसे संपर्क कर सकते हैं। हम हमेशा आपकी पूर्ण सहायता करेंगे।
यदि आप यह अरंडी की खीर बनाने में असमर्थ हैं, तो हमने इसे पाउडर फॉर्म में बनाकर तैयार किया है। आपको इसमें ज्यादा कुछ नहीं करना है, केवल पानी डालकर इसे विधि के अनुसार तैयार करना है।

हमने इसे इसी तरीके से तैयार किया है, जिसमें बताए गए सभी तत्व शामिल हैं। बकरी के दूध को भी हमने ड्राई फॉर्म में इसमें मिलाया है।

आप इस प्रोडक्ट को Ayur Air वेबसाइट के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए आप हमारी वेबसाइट पर दिए गए WhatsApp नंबर या Contact Number पर हमसे संपर्क कर सकते हैं।

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