
परिचय
पुरुषों के अंदर दिन-प्रतिदिन कम इच्छा होती जा रही है। उनका गृहस्थ जीवन प्रभावित हो रहा है। वे अपना गृहस्थ जीवन रुचिपूर्ण ढंग से नहीं जी पा रहे हैं। खानपान संबंधी अनेक समस्याओं से ग्रस्त हो रहे हैं। केमिकल युक्त चीजों का प्रयोग लगातार कर रहे हैं। रात को भी कामेच्छा की प्रवृत्ति महसूस नहीं होती। वे अपने गृहस्थ जीवन को अच्छी तरह से व्यतीत नहीं कर पा रहे हैं।
ऐसी स्थिति में लोग मेडिकल के पास जाते हैं और धीरे-धीरे दवाइयों के शिकार होते जा रहे हैं। अंग्रेजी दवाइयाँ खाते जा रहे हैं और अपने प्राकृतिक सुखमय तथा आनंदमय जीवन को धीरे-धीरे समाप्त करते जा रहे हैं।
हमने आपके लिए आयुर्वेदिक विधि से इन समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया है। हम आपके लिए लिबिडो शक्ति और कामेच्छा शक्ति को प्राकृतिक रूप से बढ़ाने के उद्देश्य से प्रकृति में उपलब्ध अच्छी-अच्छी औषधियों की जानकारी ला रहे हैं और आगे भी लाते रहेंगे। हम आपके लिए लगातार रिसर्च कर रहे हैं।
इस लेख में हमने बताया है कि बरगद का दूध, गूलर का फल, बांस के पत्ते और बताशा किस प्रकार पारंपरिक आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार आपकी लिबिडो शक्ति और कामेच्छा शक्ति के लिए सहायक माने जाते हैं। साथ ही यह भी समझने का प्रयास करेंगे कि ये प्राकृतिक तत्व आपके अंदर एक आनंदमय गृहस्थ जीवन जीने में किस प्रकार सहयोग कर सकते हैं।
आप मेडिकल की शरण में जाते हो और वहाँ से कई तरह की दवाइयाँ, टैबलेट्स माँगते हो आनंदमय गृहस्थ जीवन जीने के लिए, पर उनका रिजल्ट तभी निकलता है जब आप उनका उपयोग करते हो। फिर आप इससे अपनी प्राकृतिक शक्ति को खत्म कर रहे हो। आप अपनी लिबिडो शक्ति, कामेच्छा को खत्म ही करते जा रहे हो।
इसलिए आप आयुर्वेदिक जीवन से जुड़ें। आयुर्वेदिक विधि में हमने यह आपके लिए आयुर्वेदिक नुस्खा बताया है, जो आपकी लिबिडो शक्ति और कामेच्छा को बढ़ाने में प्रयास करेगा। अगर आप इसे नियमित रूप से अपनाओगे, तो आप अपने जीवन को सुखमय और आनंदमय बना सकते हो।
हमारी Ayur Air पर आपको अनेक शोध मिलेंगे, जो आपके लिए लाभप्रद हो सकते हैं। अगर आप हमारे हिसाब से दैनिक रूटीन में इन चीजों को अपनाएँगे, तो हम इस विधि में बताएँगे कि इसे किस तरीके से खाना है, क्या खाना है, क्या नहीं खाना है, किस तरीके से इस आयुर्वेदिक नुस्खे को उपयोग करना है। इसमें हमने यही बताया है कि इसे किस तरीके से खाना है, कब खाना है, कब इन आयुर्वेदिक दवाइयों को और इन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों को अपने जीवन में उपयोग करना है।
इसलिए बार-बार मेडिकल पर न जाएँ, अंग्रेज़ी दवाइयों का सेवन न करें। आप अपने जीवन को सुखमय बनाने के लिए हमारे द्वारा बताई गई आयुर्वेदिक विधि को अपनाएँ और अपने जीवन को सुखमय बनाने का प्रयास करें।
पुरुषों की कामेच्छा (Libido) कम होने के मुख्य कारण
ड्रग्स संबंधी अर्थात दवाइयों का अधिक उपयोग करना, नशीले पदार्थों का सेवन करना, कामेच्छा बढ़ाने के लिए मेडिकल पर जाकर अनेक केमिकल युक्त टैबलेट्स और अन्य दवाइयों का उपयोग करना। इससे व्यक्तियों की कामेच्छा और लिबिडो पावर खत्म होती जा रही है। हर व्यक्ति मेडिकल की दवाइयों पर ही निर्भर हो गया है। हर व्यक्ति आयुर्वेद को पहचान नहीं रहा है। हम आयुर्वेद को आपके लिए लेकर आ रहे हैं, लेकिन आप आयुर्वेद को प्रधानता नहीं दे रहे हो।
आप शॉर्टकट चाहते हो। अरे, पैसा कमाने में शॉर्टकट अपना लो, कपड़ा लेने में शॉर्टकट अपना लो, लेकिन जीवन जीने के लिए शॉर्टकट मत अपनाओ। हमारा यही लक्ष्य है कि आपको स्वस्थ जीवन देना और आपको स्वस्थ बनाना।
लोग आयुर्वेदिक तरीके से कुछ भी नहीं खा रहे हैं। कभी खट्टा, कभी कब्ज करने वाली वस्तुएँ अधिक खा लेते हैं। खट्टा कम खाएँ। पारंपरिक आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार अधिक खट्टा खाने से पुरुषों की कामेच्छा और शक्ति पर प्रभाव पड़ सकता है। आपकी आयु, सीमेन (वीर्य) और उसकी गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है। वीर्य पतला पड़ सकता है तथा शीघ्र स्खलन की समस्या भी हो सकती है। इसलिए खट्टे पदार्थों का अधिक सेवन भी कामेच्छा की शक्ति को कम करने का एक कारण हो सकता है।
खानपान में नियमितता नहीं रखना, उल्टे-सीधे समय पर भोजन करना, दैनिक रूटीन में आयुर्वेदिक चीजों को शामिल न करना, केमिकल के प्रति अधिक आकर्षित होना, केमिकल वाले विटामिन, कैप्सूल आदि का उपयोग करना, प्राकृतिक चीजों से मिलने वाले प्रोटीन और शरीर के आवश्यक तत्वों के बजाय केमिकल युक्त पदार्थों का सेवन करना, बाज़ार से आने वाले दूध का उपयोग करना और आयुर्वेदिक दूध को न अपनाना भी इसके कारण हो सकते हैं।
हम आपके लिए भविष्य में आयुर्वेदिक दूध का भी उत्पादन करने का प्रयास करेंगे। हमारा प्रयास रहेगा कि आपको आयुर्वेदिक दूध उपलब्ध कराया जाए, जो आपको स्वस्थ बनाने में सहायक बनने का प्रयास करेगा।
इत्यादि अनेक कारणों से पुरुषों की शक्ति और कामेच्छा प्रभावित हो रही है।
बरगद का दूध क्या है और आयुर्वेद में इसका महत्व
बरगद का दूध बरगद के वृक्ष की ताज़ी टहनियों, पत्तियों तथा छाल से निकलने वाला एक सफेद प्राकृतिक लेटेक्स (दुग्धरस) होता है। आयुर्वेद में बरगद को एक महत्वपूर्ण औषधीय वृक्ष माना गया है। इसकी जड़, छाल, पत्तियाँ, फल तथा दूध का उल्लेख विभिन्न पारंपरिक आयुर्वेदिक ग्रंथों में किया जाता है।
बरगद का दूध आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार शरीर को बल प्रदान करने, धातुओं के पोषण, पुरुष शक्ति को बनाए रखने तथा शारीरिक कमजोरी को दूर करने में सहायक माना जाता है। यही कारण है कि इसे कामेच्छा और पुरुष शक्ति से जुड़े पारंपरिक आयुर्वेदिक नुस्खों में भी उपयोग किया जाता है।
बरगद का दूध और बताशा, इन दोनों के संयोजन से पारंपरिक आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार अच्छे परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। यह लिबिडो शक्ति की प्रगति में सहायता प्रदान करने के लिए उपयोग किया जाता है। आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार बरगद का दूध सीमेन अर्थात् वीर्य को गाढ़ा बनाने में सहायक माना जाता है तथा पुरुषों के शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने में भी सहायक हो सकता है।
पुरुषों की लिबिडो शक्ति के लिए गूलर के फल के पारंपरिक लाभ
गूलर का फल आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण औषधीय फल माना गया है। इसके फल, छाल, पत्तियाँ तथा दूध का उपयोग विभिन्न पारंपरिक आयुर्वेदिक नुस्खों में किया जाता है।
पारंपरिक आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार गूलर का फल शरीर को पोषण देने, धातुओं को पुष्ट करने तथा पुरुष शक्ति को बनाए रखने में सहायक माना जाता है। यानी लिबिडो शक्ति को बनाए रखने और उसका संतुलन बनाए रखने में सहायक माना जाता है। पुरुष शक्ति को बनाए रखने में भी इसे सहायक माना जाता है।
आयुर्वेदिक पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार गूलर का फल कामेच्छा तथा लिबिडो शक्ति को संतुलित बनाए रखने में सहायक माना जाता है। यह शरीर को प्राकृतिक रूप से बल प्रदान करने में सहायक होता है। नियमित एवं उचित मात्रा में इसका सेवन करने से पुरुषों की लिबिडो शक्ति में सुधार हो सकता है।
पारंपरिक आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार गूलर का फल वीर्य को पुष्ट करने, शुक्र धातु के पोषण तथा पुरुषों की प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाने में उपयोगी माना जाता है। इन्हीं कारणों से इसे आयुर्वेद में शामिल किया जाता है।
पारंपरिक आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार गूलर का फल वीर्य को गाढ़ा बनाने में भी सहायक माना जाता है।
पुरुषों की लिबिडो शक्ति और कम कामेच्छा के लिए बाँस के पत्तों के पारंपरिक लाभ
पुरुषों की पौरुष शक्ति बढ़ाने में पारंपरिक आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार इसका उपयोग किया जाता है। यह पुरुषों की नसों में ताकत और मजबूती प्रदान करने में सहायक होते हैं। यह शरीर को मजबूत बनाने में सहायक होते हैं। बाँस के पत्ते शरीर को सख्त और कठोर बनाने में सहायक माने जाते हैं और शरीर के जो कुछ गुप्त अंग होते हैं, उन्हें मजबूत बनाने में तथा बॉडी के हर पार्ट को मजबूत बनाने में यह बाँस का पत्ता बहुत ही सहायक माना जाता है। इसमें कैल्शियम बहुत अधिक मात्रा में पाई जाती है।
इन बाँस के पत्तों में कैल्शियम की मात्रा ज्यादा होती है, जो आपकी बॉडी को मजबूती प्रदान करने में बहुत ही सहायक होता है। कैल्शियम शरीर की मजबूती और हड्डियों के सामान्य स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्व माना जाता है।
पुरुषों की Libido (कामेच्छा) के लिए बरगद का दूध और बताशा, गूलर का फल तथा बांस के पत्तों का पारंपरिक उपयोग
यदि आपकी कामेच्छा (Libido) में कमी आ गई है और आप उसमें सुधार लाने के लिए किसी पारंपरिक आयुर्वेदिक उपाय की जानकारी चाहते हैं, तो यह नुस्खा आपके लिए उपयोगी हो सकता है। कामेच्छा कम होने के कई कारण हो सकते हैं, जिनका उल्लेख हम पहले भी कर चुके हैं। यदि उन कारणों की वजह से आपके अंदर कमी आई है, तो यह पारंपरिक विधि उसमें सुधार लाने का प्रयास कर सकती है। यह नुस्खा प्राचीन परंपराओं और आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार बताया जाता है।
सुबह बरगद के दूध और बताशे का उपयोग
सुबह-सुबह फ्रेश होकर और शौच आदि से निवृत्त होने के बाद बरगद के पेड़ के पास जाएँ। अपनी जेब में चार बताशे लेकर जाएँ।
अब एक नुकीले पत्थर की सहायता से बरगद के तने पर हल्का स्पर्श करें, जिससे यदि दूध (लेटेक्स) निकले तो उसे पहले बताशे में लेकर खा लें।
इसी प्रकार दूसरा बताशा लें, उसमें भी बरगद का दूध लेकर खा लें।
फिर तीसरे बताशे के साथ भी यही प्रक्रिया करें और उसे खा लें।
इसके बाद चौथे बताशे के साथ भी यही विधि अपनाएँ और उसे भी खा लें।
चार बताशों से अधिक का उपयोग न करें। इसके बाद अपने घर वापस आ जाएँ। घर आने के लगभग एक घंटे बाद ही भोजन करें।
शाम को बांस के पत्तों का पारंपरिक उपयोग
शाम लगभग 5 बजे के आसपास बांस के पेड़ से दो या तीन ताजे पत्ते तोड़कर लाएँ। उन्हें सिलबट्टे पर अच्छी तरह पीस लें। इसके बाद कपड़े या छलनी से छानकर उनका रस निकाल लें। इस रस में स्वादानुसार चीनी मिलाकर पी लें।
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार बांस के पत्तों का यह उपयोग शरीर को मजबूती प्रदान करने और शरीर के पोषण में सहायक माना जाता है।
इसके लगभग एक घंटे बाद या अपने नियमित समय के अनुसार रात का भोजन कर लें।
रात को गूलर के फल के चूर्ण का उपयोग
रात को भोजन करने के बाद, सोने से पहले गूलर के फल का चूर्ण लें।
यदि गूलर के फल का चूर्ण बनाना नहीं जानते हैं, तो इसकी पारंपरिक विधि इस प्रकार है—
गूलर के पेड़ से गिरे हुए पके फलों को इकट्ठा करें। उन्हें अच्छी धूप में अच्छी तरह सुखा लें। सूख जाने के बाद उन्हें लोहे की ओखली या खरल में कूटकर बारीक चूर्ण बना लें। फिर छलनी से छानकर महीन पाउडर तैयार करें। इसके बाद इसमें स्वादानुसार पिसी हुई मिश्री (खांड वाली मिश्री) मिला दें। इस मिश्रण को किसी साफ और ढक्कन वाले पात्र में सुरक्षित रख दें।
रात को सोने से पहले इस चूर्ण की लगभग एक छोटी चम्मच मात्रा लें और ऊपर से हल्का गुनगुना दूध पी लें।
पारंपरिक आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार यदि इस विधि को नियमित रूप से अपनाया जाए, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली का पालन किया जाए, तो यह पुरुषों के स्वास्थ्य और कामेच्छा में सुधार लाने में सहायक माना जाता है
यदि आप हमारे द्वारा बताई गई इस आयुर्वेदिक विधि को अपनाते हैं, तो आप अपने जीवन को सुखमय और आनंदमय बना सकते हैं। यह पारंपरिक आयुर्वेदिक नुस्खा पुरुषों की कामेच्छा (Libido) में सुधार लाने में सहायक माना जाता है। कामेच्छा में कमी आने का कारण कोई भी हो सकता है, लेकिन इस विधि को नियमित रूप से अपनाने से उसमें सुधार होने की संभावना मानी जाती है। आप अपने जीवन को अधिक सुखद, संतुलित और आनंदमय बना सकते हैं।
इस दौरान क्या खाएँ और क्या न खाएँ
यदि आप Ayur Air द्वारा बताई गई इस पारंपरिक आयुर्वेदिक विधि का पालन कर रहे हैं, तो इस दौरान अपने खान-पान पर विशेष ध्यान दें।
इस अवधि में खट्टे पदार्थों के सेवन से बचें। दही, छाछ तथा अधिक खट्टे खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
कब्ज़ पैदा करने वाले खाद्य पदार्थ, जैसे कच्चे चावल, उड़द की दाल और भिंडी का सेवन करने से बचें।
खट्टी सब्ज़ियों का सेवन भी न करें।
दूध का सेवन सीमित मात्रा में करें। यदि दूध पीते हैं, तो एक गिलास से अधिक दूध का सेवन न करें।
अपने भोजन में हरी सब्ज़ियाँ और रोटी को शामिल करें तथा संतुलित और पौष्टिक आहार लें, जिससे आपका स्वास्थ्य अच्छा बना रहे।
चेतावनी:
यदि आप इस पारंपरिक आयुर्वेदिक विधि का पालन कर रहे हैं, तो पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार जब तक यह विधि चल रही हो, तब तक वैवाहिक अथवा यौन संबंधों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। यदि आपकी शादी हो चुकी है, तो इस अवधि में संबंध बनाने से परहेज़ करें। यदि आप अविवाहित हैं, तो भी इस दौरान यौन संबंधों से दूर रहने का प्रयास करें। यह पारंपरिक मान्यता है।
संपर्क करें
यदि आपको इस पारंपरिक विधि का कोई भी भाग समझने में कठिनाई हो, किसी जानकारी के बारे में अधिक जानना चाहते हों या इस विषय में कोई प्रश्न पूछना चाहते हों, तो आप हमसे संपर्क कर सकते हैं।
यदि आप इस विधि से संबंधित तैयार पैक खरीदना चाहते हैं, तो भी आप हमसे संपर्क कर सकते हैं।
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