Natural Ayurvedic Soap for Pimples, Acne, Dark Spots, Freckles & Skin Tanning | चेहरे के लिए आयुर्वेदिक साबुन | Ayur Air

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आज जो लोग केमिकल्स के प्रति भाग रहे हैं और केमिकल युक्त उत्पादों का उपयोग कर रहे हैं, वे अपने चेहरे और त्वचा को खराब कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर वे आयुर्वेद को भूलते जा रहे हैं। आयुर्वेद सर्वोत्तम है। आयुर्वेद ही प्रकृति का वरदान है। यह हमें प्रकृति द्वारा दिया गया अनमोल उपहार है। इसे अपनाइए।

जो प्रकृति ने आप लोगों के लिए दिया है, उसे छोड़कर आप केमिकल्स से बने हुए उत्पादों का उपयोग क्यों कर रहे हैं? प्रकृति से हटकर बने हुए उत्पादों का प्रयोग क्यों कर रहे हैं? प्रकृति के अनुसार चलिए। प्रकृति के अनुसार बने हुए आयुर्वेदिक उत्पादों का उपयोग कीजिए।

आज हम उस साबुन के बारे में बताएंगे, जिसका आप प्रतिदिन घर पर स्नान करने के लिए उपयोग करते हैं। हम आपको बताएंगे कि उस साबुन में क्या-क्या होता है और उसमें मौजूद कौन-कौन से केमिकल हमारी त्वचा और शरीर के लिए हानिकारक हो सकते हैं।

हमने इस विषय पर बहुत सारे शोध (रिसर्च) किए। जब हमने अध्ययन किया, तो पाया कि बाजार में मुख्य रूप से तीन प्रकार के साबुन उपलब्ध हैं—

Grade 1 Soaps (TFM Minimum 76%)
Grade 2 Soaps (TFM Minimum 70%)
Grade 3 Soaps (TFM Minimum
60%)

इन तीनों प्रकार के साबुनों में TFM (Total Fatty Material) की मात्रा अलग-अलग होती है, जैसा कि हमने ऊपर बताया है।

आज हम में से अधिकांश लोग प्रतिदिन स्नान के लिए ग्रेड-3 के साबुन का उपयोग कर रहे हैं, जो हमारी त्वचा के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं होता। अब हम आपको बताते हैं कि आखिर TFM क्या होता है।

TFM क्या होता है?

TFM का पूरा नाम Total Fatty Material होता है।

यह इस बात पर निर्भर करता है कि साबुन बनाने में किस प्रकार के तेल का उपयोग किया गया है। यदि साबुन बनाने में अच्छी गुणवत्ता वाला तेल, जैसे शुद्ध नारियल का तेल (Pure Coconut Oil) या अन्य उच्च गुणवत्ता वाले प्राकृतिक तेलों का उपयोग किया जाता है, तो साबुन का TFM अधिक होता है।

लेकिन अच्छी गुणवत्ता वाले तेलों का उपयोग करने से साबुन की लागत बढ़ जाती है। इसलिए बाजार में कई केमिकल फैक्ट्रियां और निर्माता लागत कम करने के लिए नारियल तेल की जगह Palm Oil का उपयोग करते हैं। कुछ निर्माता तो Animal Fat (पशु वसा) का भी उपयोग करते हैं। अर्थात पशुओं की चर्बी से निकाले गए फैट का प्रयोग साबुन बनाने में किया जाता है, जिसका हमें पता भी नहीं चलता कि हमारे साबुन में क्या-क्या मिलाया गया है।

अधिकतर Grade-3 के साबुनों में ऐसी सामग्री का उपयोग किया जाता है। यदि किसी साबुन पर “Tallow Soap” लिखा हुआ हो, तो इसका अर्थ है कि उस साबुन में Animal Fat (पशु वसा) का प्रयोग किया गया है।

इसके अलावा हमने और भी रिसर्च की, क्योंकि हमारी टीम लगातार रिसर्च पर रिसर्च करती रहती है और हम भी अपनी टीम को पूरा सहयोग प्रदान करते रहते हैं।

हमने पाया कि केवल TFM ही नहीं, बल्कि साबुन के नूडल्स (Soap Noodles) बनाने में SLS (Sodium Lauryl Sulfate) नाम का एक केमिकल भी मिलाया जाता है।

यह एक सस्ता और झाग बनाने वाला केमिकल है। यह सफाई तो करता है, लेकिन सफाई के साथ-साथ हमारी त्वचा को अत्यधिक रूखा (Dry) भी बना देता है। हमारी त्वचा की प्राकृतिक नमी और प्राकृतिक चमक को समाप्त कर देता है। कई लोगों की त्वचा पर सफेद परत जैसी दिखाई देने लगती है। त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा कम हो जाती है, जिससे चेहरे की चमक धीरे-धीरे खत्म होने लगती है और चेहरा समय से पहले बूढ़ा दिखाई देने लगता है।

जिन लोगों को सोरायसिस (Psoriasis) जैसी त्वचा संबंधी समस्या है, उन्हें SLS युक्त उत्पादों से दूर रहना चाहिए, क्योंकि इससे उनकी समस्या और अधिक बढ़ती है।

इसके बाद हमने यह भी पाया कि कई साबुनों में Paraben नाम का केमिकल भी मिलाया जाता है। यह उत्पाद को लंबे समय तक सुरक्षित रखने (Preservative) के लिए उपयोग किया जाता है, लेकिन यह शरीर के लिए हानिकारक माना जाता है।

तीसरी बात हमने यह पाई कि हमारी त्वचा का अपना एक pH Level होता है।

pH का अर्थ Potential of Hydrogen होता है।

हमारी त्वचा का सामान्य pH लगभग 5.4 से 5.9 के बीच होता है।

जबकि बाजार में मिलने वाले अधिकांश साबुनों का pH लगभग 8, 9 या 10 होता है, जो हमारी त्वचा के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। हमारी त्वचा स्वाभाविक रूप से लगभग 5.4 से 5.9 pH के वातावरण में बेहतर रहती है।

इन्हीं केमिकल युक्त उत्पादों से लोगों को जागरूक करने और प्राकृतिक आयुर्वेदिक उत्पादों तक पहुँचाने के उद्देश्य से हमने अपनी वेबसाइट बनाई है। हम अपनी वेबसाइट और ब्लॉग पर लगातार कार्य कर रहे हैं तथा प्राकृतिक आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्माण भी कर रहे हैं। हमारा पूरा प्रयास रहेगा कि हम ये उत्पाद आप तक पहुँचाएँ।

यदि आप हमसे ये उत्पाद खरीदना चाहते हैं, तो हमारी वेबसाइट पर दिए गए WhatsApp नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें संदेश भी भेज सकते हैं और सीधे बात भी कर सकते हैं। हम आपको प्राकृतिक एवं आयुर्वेदिक उत्पाद उपलब्ध कराने का पूरा प्रयास करेंगे।

हम जिस साबुन का निर्माण कर रहे हैं, उसमें Natural Coconut Oil, Multani Mitti, मसूर का आटा, चने का आटा (बेसन), मेथी का आटा, चावल का आटा, Aloe Vera, Neem Powder, Gulab Powder, Kapoor, Menthol, Chaulmugra Oil तथा Karanj Oil आदि प्राकृतिक सामग्री का उपयोग किया जाता है।

इन सभी प्राकृतिक आयुर्वेदिक तत्वों को मिलाकर हम आपके लिए ऐसा साबुन तैयार करते हैं, जो त्वचा की देखभाल आयुर्वेदिक रूप से करता है। यह आपकी त्वचा की सुंदरता बनाए रखने में सहायक होता है, प्राकृतिक चमक प्रदान करता है और आपको प्रकृति से जोड़ता है।

हमारा उद्देश्य आपको हमेशा प्रकृति के साथ जोड़कर रखना है। यदि आप इस साबुन का नियमित उपयोग करेंगे, तो आपकी त्वचा की प्राकृतिक चमक बनी रहेगी। चेहरे का रूखापन कम होगा, पिंपल्स में सहायता मिलती है, त्वचा को स्वच्छ रखने में मदद मिलेगी तथा त्वचा अधिक स्वस्थ महसूस होगी।

इसी प्रकार हम आपके लिए आयुर्वेदिक उत्पाद तैयार कर रहे हैं और आयुर्वेद के माध्यम से आपको हमेशा प्रकृति से जोड़ने का प्रयास करते रहेंगे। हमारा उद्देश्य है कि प्रकृति का यह अमूल्य वरदान अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचे।

आयुर्वेदिक सोप बनाने की विधि_

सबसे पहले हम एलोवेरा का रस निकालते हैं। एलोवेरा से जेल निकालने की विधि हम आपको पहले ही बता चुके हैं। उसी विधि के अनुसार एलोवेरा का जेल निकालकर उसका रस तैयार करते हैं और फिर उसे छलनी से अच्छी तरह छान लेते हैं।

इसके बाद उसमें वर्जिन नारियल का तेल (Virgin Coconut Oil) मिलाते हैं। नारियल का तेल मिलाने के बाद उसमें चावल का आटा, मसूर का आटा, गुलाब पाउडर, मेथी पाउडर, नीम पाउडर तथा कपूर और मेंथॉल भी मिलाते हैं।

यदि मेंथॉल की बात करें तो मेंथॉल शरीर को ठंडक प्रदान करता है। यह हमारी त्वचा को ठंडा रखता है, शरीर को कूलिंग इफेक्ट देता है तथा त्वचा की जलन और इरिटेशन को कम करने में सहायता करता है।

यदि कपूर की बात करें तो कपूर त्वचा के बंद रोमछिद्रों (पोर्स) को साफ रखने में सहायक होता है। यह भी शरीर को ठंडक प्रदान करता है तथा चेहरे और शरीर पर मौजूद दाग-धब्बे, झाइयाँ आदि को धीरे-धीरे कम करने में मदद करता है।

इन सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाकर एक गाढ़ा घोल तैयार किया जाता है। जब यह घोल अच्छी तरह तैयार हो जाता है, तब इसे हमारी मशीन में डाला जाता है। मशीन के रोलर में इस घोल को घुमाया जाता है। रोलर में घूमने के बाद इसकी परतें धीरे-धीरे बनती हैं और उन्हीं परतों से इसे आगे तैयार किया जाता है। इसके बाद इसे नूडल्स जैसी आकृति दी जाती है और फिर उसी सामग्री से सोप (साबुन) का निर्माण किया जाता है।

हम बाज़ार से मिलने वाले SLS और SLES जैसे रसायनों वाले साबुन नूडल्स का उपयोग नहीं करते। हम अपने सोप को मुल्तानी मिट्टी के सहयोग से तैयार करते हैं।

यदि मुल्तानी मिट्टी की बात करें तो यह त्वचा को टाइट करने में सहायता करती है और चेहरे पर प्राकृतिक सुंदरता तथा निखार लाने में मदद करती है। हमारे इस घोल में मुल्तानी मिट्टी का उपयोग किया जाता है, जिससे त्वचा को प्राकृतिक रूप से साफ और निखरी हुई चमक मिलती है।

आपने देखा होगा कि यदि आप केमिकल युक्त साबुन का उपयोग करते हैं, तो धीरे-धीरे आपकी त्वचा रूखी और बेजान होने लगती है। ऐसी त्वचा पर यदि आप नाखून से हल्का-सा भी खुजलाते हैं, तो सफेद-सफेद स्क्रैच या निशान दिखाई देने लगते हैं। लेकिन यदि आप हमारे द्वारा तैयार किए गए मुल्तानी मिट्टी युक्त प्राकृतिक आयुर्वेदिक सोप का उपयोग करेंगे, तो आपकी त्वचा पर प्राकृतिक चमक और निखार बना रहेगा तथा यदि आप अपनी त्वचा को नाखून से खुजलाते हैं, तो त्वचा पर सफेद-सफेद निशान या स्क्रैच दिखाई देने लगते हैं। तथा इस प्रकार के सफेद स्क्रैच नहीं बनेंगे।

रासायनिक साबुनों का अधिक उपयोग करने से त्वचा धीरे-धीरे बेजान होने लगती है। इसके बाद लोग त्वचा की नमी और चमक वापस लाने के लिए अलग से बॉडी लोशन का उपयोग करते हैं। धीरे-धीरे त्वचा अपनी प्राकृतिक चमक खो देती है।

इसलिए आप आयुर्वेद को अपनाइए। आयुर्वेदिक ही सर्वोत्तम जीवन है। आयुर्वेदिक विधि द्वारा तैयार किए गए सोप का उपयोग कीजिए और रासायनिक उत्पादों से बचि

नोट

हमारा साबुन झाग नहीं देता, क्योंकि यह पूर्ण रूप से प्राकृतिक सामग्री से निर्मित होता है। इसमें किसी भी प्रकार के कृत्रिम झाग बनाने वाले रसायन नहीं होते। आप इसका उपयोग बच्चों के लिए भी कर सकते हैं। छोटे बच्चों से लेकर बड़े लोगों तक, सभी इसका उपयोग कर सकते हैं। इसका त्वचा पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।

यह प्रकृति द्वारा निर्मित है, इसलिए यह आपकी त्वचा को प्राकृतिक रूप से पोषण देता है और आपकी त्वचा को प्रकृति से जोड़कर रखता है। इसे लगाने पर त्वचा को पूरी तरह प्राकृतिक अनुभव होता है। यदि आप चाहें, तो इसे अपने घर पर भी स्वयं बनाकर उपयोग कर सकते हैं।

लगाने की विधि

यदि आप नहाने जा रहे हैं, तो सबसे पहले इस साबुन को अपनी पूरी बॉडी पर अच्छी तरह लगा लें। इसके बाद इसे लगभग 2–3 मिनट तक त्वचा पर लगा रहने दें। जब यह त्वचा पर अच्छी तरह लग जाए, तब पानी से स्नान करें।

इसके नियमित उपयोग से आपकी त्वचा की गंदगी साफ होगी, त्वचा का रूखापन और बेजानपन धीरे-धीरे कम होगा तथा त्वचा साफ, मुलायम और प्राकृतिक रूप से निखरी हुई दिखाई देगी। इसके नियमित उपयोग से झुर्रियाँ, झाइयाँ और दाग-धब्बे भी धीरे-धीरे कम होने लगते हैं।

घर पर बनाने की विधि_

इस साबुन को बनाने की विधि हम आपको ऊपर बता चुके हैं। यदि फिर भी आपको समझ में नहीं आई हो, तो एक बार फिर बता रहे हैं।

इसमें बताए गए सभी उत्पादों को मुल्तानी मिट्टी में भी मिला लें। मुल्तानी मिट्टी इस साबुन का एक महत्वपूर्ण और पूर्ण सहयोगी घटक है। इसके बाद इस पूरे मिश्रण को अच्छी तरह मिलाकर गाढ़ा और सख्त कर लें।

यदि आपके पास साबुन बनाने की मशीन नहीं है, तो आप रोलर या मशीन की सहायता नहीं ले पाएँगे। ऐसी स्थिति में आप इस मिश्रण को अपने हाथों से धीरे-धीरे दबाकर, आकार देकर और अच्छी तरह सख्त करके साबुन का पूरा आकार तैयार कर सकते हैं।

यदि आप प्राकृतिक आयुर्वेदिक साबुन खरीदना चाहते हैं, लेकिन इसे घर पर बनाने में सक्षम नहीं हैं या आपके पास समय नहीं है, तो आप हमसे संपर्क कर सकते हैं। आप दिए गए WhatsApp नंबर पर हमें संदेश भेज सकते हैं। हमारा WhatsApp नंबर Contact Us पेज पर उपलब्ध है।

हमारी Ayur Air वेबसाइट पर आपको अनेक प्रकार की समस्याओं का आयुर्वेदिक समाधान मिलेगा। यदि आपको किसी भी प्रकार की जानकारी चाहिए या हमसे संपर्क करना चाहते हैं, तो आप हमारी वेबसाइट के माध्यम से हमसे संपर्क कर सकते हैं।

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