
मां के स्तनों में दूध न बनने के कारण
मां के स्तनों में दूध कम बनने या नहीं बनने के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें मुख्य कारणों में ऑक्सीटोसिन (Oxytocin) हार्मोन
का कम बनना या पर्याप्त मात्रा में न बनना भी शामिल है। ऑक्सीटोसिन हार्मोन कम बनता है तो मां अपने बच्चे के प्रति स्नेह कम कर पाती है और दूध भी कम आता है। इसलिए इसे Love हार्मोन भी कहा जाता है। यह प्यार उत्पन्न करता है मां का शिशु के प्रति।
स्तनपान की प्रक्रिया में प्रोलैक्टिन (Prolactin) और ऑक्सीटोसिन (Oxytocin) जैसे हार्मोन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रोलैक्टिन मुख्य रूप से स्तनों में दूध बनाने की प्रक्रिया में मदद करता है, जबकि ऑक्सीटोसिन स्तनों में बने दूध को दूध की नलिकाओं के माध्यम से बाहर निकलने यानी दूध उतरने (Let-down Reflex) में मदद करता है।
नींद कम लेना, अनिद्रा, तनाव, चिंता जैसे कई कारण हैं और अनियमित भोजन, धूम्रपान,
बच्चे को कम दूध पिलाना, रोक-रोक कर दूध पिलाना, दूध को स्तनों में रोक लेना, यह भी दूध कम आने के कारण हो सकते हैं। इसीलिए बच्चे को जब भी दूध पिलाएं, तो दूध को रोकें नहीं। यानी अपनी प्रक्रिया के अनुसार स्तनपान की प्रक्रिया में बच्चे को पूरा दूध पिला देना चाहिए। जब भी आप यह प्रक्रिया रखते हैं, तब तक इसे जारी रखें, जब तक आप अपने स्तनों के दूध को कम नहीं करना चाहते। यानी सुबह से शाम तक और रात्रि तक, जब तक बच्चा सोने जाता है, तब तक इस प्रक्रिया को पूरा करना चाहिए।
खान-पान संबंधी कई कारण हैं। इन कारणों से मां के स्तनों में दूध कम बनता है या नहीं बनता है।
वहीं, इसके समाधान के लिए आयुर्वेद में शतावरी और रुद्रवंती जैसी जड़ी-बूटियों का उपयोग करके आप समस्या के समाधान में सहायता प्राप्त कर सकते हैं। अगर आप हमारे द्वारा बताई गई विधि के अनुसार निश्चित रूप से और नियमित रूप से इसका सेवन करते हैं, तो आप लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
आप कैसी भी मां हों, आपके स्तनों से दूध उतरने में और दूध की ग्रोथ करने में यह हार्मोन सहायक हो सकता है।
मां का दूध शिशु के लिए क्यों महत्वपूर्ण है
मां के दूध में शिशु की वृद्धि और विकास के लिए आवश्यक प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और खनिज उचित मात्रा में होते हैं। इसमें एंटीबॉडी और अन्य प्रतिरक्षा संबंधी घटक होते हैं, जो शिशु की रोग-प्रतिरोधक क्षमता के लिए मददगार होते हैं और यह मां का दूध है, जो आसानी से पच जाता है।
स्तनपान के बीच मां और शिशु के प्रति भावनात्मक जुड़ाव होता है। प्यार उत्पन्न होता है, मां का शिशु के प्रति और शिशु का मां के प्रति प्यार-स्नेह उत्पन्न होता है।
कोलोस्ट्रम का महत्व—जन्म की शुरुआती दिनों में निकलने वाला पीला गाढ़ा दूध होता है, वह कोलोस्ट्रम कहलाता है। इसमें प्रतिरक्षा संबंधी बहुत ही घटक होते हैं। इसमें बहुत ही पोषक तत्व होते हैं, जो शिशु के लिए बहुत ही आवश्यक होते हैं।
मां का पहला दूध बच्चे के लिए वरदान होता है,मां का पहला दूध पिलाना चाहिए बच्चे को।
जो बच्चे अपनी मां का पहला प्रसव दूध नहीं पी पाते, उसमें सबसे बड़ी बात यह है कि कुपोषण के शिकार हो जाते हैं। आगे चलकर यानी उनका विकास नहीं हो पाता। इसलिए शारीरिक विकास में भी यह बहुत ही सहायक और महत्वपूर्ण होता है।
शतावरी क्या है?
शतावरी एक प्रसिद्ध औषधीय पौधा है, जिसका उपयोग आयुर्वेद में लंबे समय से किया जाता है। इसकी जड़ का मुख्य रूप से उपयोग किया जाता है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में शतावरी को विशेष रूप से महिलाओं के स्वास्थ्य से संबंधित पारंपरिक उपयोगों के लिए जाना जाता है।
शतावरी का पारंपरिक रूप से दूध से संबंधित समस्याओं और स्तनपान के दौरान दूध बनने में सहायता के लिए भी उपयोग किया जाता है। इसके अलावा, महिलाओं से जुड़ी विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं में भी इसका उपयोग आयुर्वेदिक परंपरा में किया जाता रहा है।
शतावरी का उपयोग पुरुषों के प्रजनन एवं वीर्य संबंधी स्वास्थ्य के लिए भी आयुर्वेद में लंबे समय से वर्णित मिलता है। आयुर्वेदिक परंपरा में इसे एक महत्वपूर्ण औषधीय जड़ी-बूटी माना गया है और इसके विभिन्न उपयोगों का वर्णन प्राचीन समय से मिलता है।
शतावरी को आप नदी के आसपास तथा कुछ प्राकृतिक क्षेत्रों में भी देख सकते हैं। आयुर्वेद में इसे विशेष रूप से स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण जड़ी-बूटी माना गया है।
शतावरी के नाम
संस्कृत नाम: शतावरी
हिंदी नाम: शतावरी
अंग्रेजी नाम: Wild Asparagus / Asparagus racemosus
वानस्पतिक नाम: Asparagus racemosus
कुल (Family): Asparagaceae
रुद्रवंती क्या है?
रुद्रवंती एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जिसका आयुर्वेद में लंबे समय से उपयोग किया जाता रहा है। बुद्ध बद्री एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, महिलाओं में स्तनपान के दौरान दूध को बढ़ाने में सहायता प्रदान करती है। जो महिलाएँ स्तनपान कराती हैं, उनके दूध नहीं आ रहा है, दूध कम बन रहा है या दूध बनने में समस्या हो रही है, जैसी समस्याओं के समाधान में सहायक हो सकती है रुद्रवंती।
रुद्रवंती के पौधे पर लंबे पीले-पीले फूल लगते हैं। यह हिमालय के ऊँचे क्षेत्रों में पाई जाती है। भारतीय इलाकों में यह हमारे क्षेत्र में भी मिल जाती है, खासकर नदी के किनारे।
रुद्रवंती के अन्य नाम
रुद्रवंती
रुद्रवन्ती
रुदंती
रुदन्ती
रुद्रन्ती
रुदन्तिका
दन्तिका
क्या शतावरी और रुद्रवंती महिलाओं के स्तनों में दूध को बढ़ा सकती हैं और बच्चे को उचित पोषण प्राप्त करने में सहायक हो सकती हैं?
हाँ, अगर आप बच्चे को हमारे द्वारा बताई गई विधि से और हमारे तरीके से रुद्रवंती और शतावरी का उपयोग करते हैं, तो यह महिलाओं के दूध को और ऑक्सीटोसिन हार्मोन को बढ़ाने में सहायक हो सकती हैं। जैसे ही ऑक्सीटोसिन हार्मोन को बढ़ाने में सहायक होंगी, यह दोनों जड़ी-बूटियाँ वैसे ही स्तनों में दूध बढ़ाने में सहायता कर सकती हैं।
अगर आप एक महिला, स्तनपान कराने वाली महिला या बिना स्तनपान कराने वाली महिला हैं और आपको लग रहा है कि आगे आपके दुग्ध स्तनों में समस्या आ सकती है या बच्चे को पोषण भर दूध नहीं मिल सकता, तो आप इसका उपयोग हमारे द्वारा बताई गई विधि के अनुसार कर सकती हैं और लाभ प्राप्त कर सकती हैं।
शतावरी और रुद्रवंती में ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो ऑक्सीटोसिन हार्मोन को बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं। ये पोषक तत्व ऑक्सीटोसिन हार्मोन बढ़ाने में सहायता प्रदान करते हैं। ऑक्सीटोसिन हार्मोन बढ़ने से महिलाओं के स्तनों में जो दुग्ध ग्रंथियाँ हैं, उनमें दूध बढ़ाने में सहायता मिलेगी और जो शिराएँ होती हैं, दुग्ध ग्रंथि की उनमें ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होने में इससे सहायता मिलेगी और दूध उतरने में यह सहायक सिद्ध हो सकते हैं।
इसलिए आप हमारे द्वारा बताई गई विधि के अनुसार इसका उपयोग करते हैं, तो आप लाभ पा सकते हैं। इसलिए यह जड़ी-बूटियाँ, दोनों शतावरी और रुद्रवंती, महिलाओं के लिए उपयोगी हो सकती हैं। अगर सही और नियमित रूप से इसका सेवन करती हैं, तो आप आयुर्वेद में इसका लाभ पा सकती हैं। यह विशेषकर महिलाओं के लिए ही प्रकृति में आई हुई जड़ी-बूटियाँ हैं।
शतावरी और रुद्रवंती को कहाँ से खरीदें?
अगर आपको शतावरी और रुद्रवंती मूल रूप में नदी के किनारे नहीं मिलती हैं, तो आप हमसे खरीद सकते हैं। Ayur Air साइट पर WhatsApp नंबर पर मैसेज करके हम आपको इनका पाउडर भी प्रदान कर सकते हैं।
नहीं तो आपको यह पंसारी की दुकान में भी मिल जाएँगी, लेकिन नकली से सावधान रहें।
शतावरी और रुद्रवंती का पाउडर बनाने की विधि
सबसे पहले आपको क्या करना है, पंसारी की दुकान पर जाना है और वहाँ से शतावरी और रुद्रवंती की जड़ लानी है। जड़ को लाकर आपको इन दोनों जड़ी-बूटियों को धूप में सुखाना है, क्योंकि आप जड़ लाओगे तो इनमें थोड़ी बहुत नमी रहती है। धूप में सुखाना जब तक इनकी नमी खत्म नहीं हो जाती।
जैसे ही नमी खत्म हो जाए तो आपको इन्हें लोहे की खरल में, लोहे की खरल से कूट लेना है। तो आप इसमें एक लसलसापन नमी से निकलेगी, फिर कूट करके इसे फिर धूप में सुखा देना।
इन दोनों जड़ी-बूटियों को सुखाने के बाद फिर नमी खत्म हो जाए, फिर कूट लेना है। फिर कूटकर इसका पाउडर बना लेना है, जब तक यह दोनों महीन हो जाएँ और छानने से छंटने जाना है और पाउडर बना लेना है।
जब पाउडर बन जाए तो उसे एक प्लास्टिक की डिब्बी में रख देना है, ढक्कन लगाकर। यह बन गया पाउडर, आपके लिए तैयार हो गया पाउडर।
शतावरी और रुद्रवंती कितनी मात्रा में होनी चाहिए?
आपको पंसारी से शतावरी और रुद्रवंती की जड़ी-बूटियाँ 100-100 ग्राम की मात्रा में लानी हैं। दोनों जड़ी-बूटियाँ बराबर मात्रा में होनी चाहिए।
शतावरी और रुद्रवंती जड़ी-बूटी पाउडर का सेवन महिलाओं को कैसे करना है?
रोजाना सेवन करना है।
सुबह 10 ग्राम और शाम 10 ग्राम।
जो महिलाएँ स्तनपान करा रही हैं अपने बच्चों को, जिनको यह समस्या आ रही है, जो भी अपना दूध बढ़ाने में इससे ज्यादा प्राप्त करना चाहती हैं, तो जो महिलाएँ सुबह फ्रेश होकर 10 ग्राम पाउडर, एक चम्मच में लेकर मुँह में डाल लें और ऊपर से एक गिलास दूध पी लें।
इसी तरह शाम को करना है। भोजन करने से 2 घंटे पहले एक गिलास दूध के साथ 10 ग्राम चम्मच में पाउडर लेकर मुँह में डाल लें और ऊपर से एक गिलास दूध पी लें।
शतावरी तथा रुद्रवंती का सेवन करते समय आवश्यक सावधानियाँ तथा क्या खाएँ और क्या न खाएँ
सावधानियाँ
जब से आप इसका उपयोग करते हैं, सुबह इसका सेवन करने के बाद, जैसे ही आप इसका सेवन कर लेते हैं, तो उसके 2 घंटे बाद तक कुछ नहीं खाना है। सामान्य पानी पीना है।
ऐसे ही शाम को आप इसका सेवन करते हैं, तो उसके 2 घंटे तक, यानी बाद तक आपको कुछ नहीं खाना है। सामान्य पानी ही पीना है।
क्या खाएँ
हरी सब्जियाँ खाएँ, दलिया खाएँ, दाल-रोटी खाएँ और फल-फ्रूट खाएँ।
क्या नहीं खाएँ
खट्टी सब्जियाँ न खाएँ, खट्टे फल न खाएँ। कोल्ड ड्रिंक न पिएँ। आइसक्रीम न खाएँ। ठंडी वस्तुओं का सेवन न करें।
कब्ज वाली चीजें—भिंडी, बैंगन, केला, चावल यानी कब्ज वाली चीजें नहीं खाएँ।
शतावरी और रुद्रवंती का सेवन कितने दिनों तक करें?
इसका सेवन जब तक आपको लाभ नहीं मिल जाता, तब तक कर सकते हैं। क्योंकि हर महिला की बॉडी अलग-अलग होती है और उनकी क्षमता भी अलग-अलग होती है। किसी को लाभ जल्दी मिल जाता है, तो किसी को थोड़ा समय लग सकता है। आमतौर पर इसका सेवन लगभग 1 से 1.5 महीने तक किया जा सकता है।
यह पाउडर कितने दिनों के लिए है?
इसमें जो पाउडर बनाया गया है, उसे आप 10 दिनों तक इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके बाद यह पाउडर खत्म हो जाएगा। यह पाउडर 10 दिनों के सेवन के लिए है। इसके बाद आप दोबारा इसी विधि से पाउडर बना सकते हैं।
नोट
अगर आपने इस बात को जानने के बाद भी इसे समझने में असमर्थ हैं या किसी बात को जानने के लिए आपको और जानकारी चाहिए, तो आप हमारी साइट Ayur Air पर दिए गए नंबर पर WhatsApp करके हमसे संपर्क कर सकती हैं।